
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने गुरवार को मप्र हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें छेड़छाड़ के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत दी थी।
हाईकोर्ट ने पिछले साल जुलाई में यह फैसला सुनाया था। इसके बाद हाईकोर्ट की वकील अपर्णा भट्ट समेत 8 महिलाओं ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
जमानत की शर्त को दी गई थी चुनौती
कोर्ट ने आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत दी थी। याचिका में महिला वकीलों का कहना था कि वे जमानत का विरोध नहीं कर रही हैं। बस राखी बंधवाने की शर्त को चुनौती दी है। इस याचिका को आधिकारिक तौर पर पी रमेश कुमार ने दायर की। इसमें जमानत की शर्त पर रोक लगाने की मांग की गई है।
सरकार ने की थी आलोचना
वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से भी सुझाव मांगा था। इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि लगता है कि जस्टिस अपने दायरे से आगे निकल गए। यह महज ड्रामा है। इसकी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि जजों को जेंडर सेंस्टाइजेशन की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। साथ ही जमानत की शर्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश सभी बेवसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए। ताकि उन्हें पता रहे क्या किया जा सकता है।
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