SEBI BIG Alert: डिजिटल गोल्ड में निवेश से हो सकता है नुकसान, जानिए क्यों और कैसे?

Published : Nov 09, 2025, 07:20 AM IST
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सार

SEBI ने डिजिटल गोल्ड में निवेश करने से निवेशकों को चेतावनी दी। कहा कि ये प्रोडक्ट्स SEBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के बाहर हैं और निवेशकों के लिए उच्च जोखिम हैं। सुरक्षित निवेश के लिए केवल रेगुलेटेड गोल्ड ETFs और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स चुनें।

नई दिल्ली। अगर आप डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो SEBI ने आपके लिए चेतावनी जारी की है। मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स SEBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के बाहर हैं और इनमें निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। ये प्रोडक्ट्स फिजिकल गोल्ड का आसान विकल्प दिखाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें निवेशक कई तरह के जोखिम झेल सकते हैं। SEBI ने स्पष्ट किया कि रेगुलेटेड गोल्ड ETFs, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स जैसी सुरक्षित विकल्पों में ही निवेश करें।

डिजिटल गोल्ड में निवेश क्यों है जोखिम भरा?

SEBI ने कहा कि डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड प्रोडक्ट्स न तो सिक्योरिटीज के रूप में नोटिफाई किए गए हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव्स के रूप में रेगुलेट। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह SEBI के दायरे से बाहर हैं। ऐसे निवेश में आपके पैसे सुरक्षित नहीं हैं और निवेशक किसी भी समय नुकसान झेल सकते हैं।

 

 

निवेशकों को क्या खतरे हैं?

डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को काउंटरपार्टी रिस्क और ऑपरेशनल रिस्क का सामना करना पड़ सकता है। मतलब, अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म बंद हो जाए या फर्जी साबित हो, तो निवेशक अपने पैसे खो सकते हैं। SEBI ने साफ कहा कि रेगुलेटेड सिक्योरिटीज पर लागू सुरक्षा उपाय डिजिटल गोल्ड में लागू नहीं होंगे।

सुरक्षित विकल्प क्या हैं?

SEBI ने निवेशकों को सुझाव दिया कि गोल्ड में सुरक्षित निवेश के लिए वे केवल रेगुलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग करें। इसमें शामिल हैं:

  • म्यूचुअल फंड द्वारा पेश किए जाने वाले गोल्ड ETFs
  • एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स
  • स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाली इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs)
  • ये सभी SEBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत आते हैं और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

डिजिटल गोल्ड बनाम फिजिकल गोल्ड में अंतर क्या है?

फिजिकल गोल्ड में निवेश करते समय निवेशक का पूरा नियंत्रण होता है, जबकि डिजिटल गोल्ड केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाया जाता है। इसके लिए भरोसा करना पड़ता है कि प्लेटफॉर्म वास्तविक गोल्ड में निवेश कर रहा है। SEBI ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म निवेशकों को भ्रामक विकल्प दिखा सकते हैं।

निवेशक क्या करें?

  • केवल SEBI द्वारा रेगुलेटेड गोल्ड ETFs या EGR में निवेश करें।
  • डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड में निवेश से बचें।
  • अगर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म निवेश का ऑफर दे, तो उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें।

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