
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में बीते कई वर्षों में शांति आई है। सुरक्षाबलों की सतर्कता के चलते घुसपैठ की घटनाओं में भी कमी आई है। पाकिस्तान को फूटी आंखों नहीं सुहा रहा है कि घाटी में शांति रहे और विकास हो। इसके चलते पाकिस्तान द्वारा एक बार फिर खूनी खेल तेज करने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आई है।
सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ के साथ नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों में बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। सेना के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इन इलाकों से घुसपैठ हो रही है। सुरक्षा बलों द्वारा घुसपैठ की कोशिशों को विफल किया जा रहा है। वहीं, इसकी भी संभावना है कि कुछ आतंकी बिना नजर में आए भारतीय क्षेत्र में घुस आएं।
राजौरी और पुंछ में पूरे साल होती है घुसपैठ की कोशिश
पाकिस्तान की रणनीति है कि भले ही 20-30 प्रतिशत घुसपैठिए मुठभेड़ों में मारे जाएं, वे और अधिक आतंकवादियों को भेजना जारी रखेंगे। राजौरी और पुंछ में पूरे साल घुसपैठ की कोशिश की जा रही है। यहां कि भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि आतंकी आसानी से सीमा पार कर जाते हैं। राजौरी और पुंछ में पिछले दो साल में घुसपैठ की कोशिश और मुठभेड़ के मामले बढ़े हैं। इसे देखते हुए सुरक्षाबलों ने अपनी योजना में फेरबदल किया है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े के अनुसार 21 अक्टूबर 2021 से इन क्षेत्रों में तीन अधिकारियों, पांच पैराट्रूपर्स और सात नागरिकों सहित कुल 26 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।
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राजौरी और पुंछ 1990 के दशक के अंत में उग्रवाद का केंद्र था। 2000 के दशक के मध्य से यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत था। हाल ही में दोनों जिलों में हिंसा बढ़ी है। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि गलवान की घटना के बाद इस क्षेत्र में सेनाएं कम हो गई थीं। अब फिर से तैनाती बढ़ाई जा रही है। कश्मीर में झटका लगने के बाद आतंकवादी अब पीर पंजाल क्षेत्र में राजौरी-पुंछ बेल्ट को निशाना बना रहे हैं।
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