
नई दिल्ली. संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन को हटाने की मांग वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालत द्वारा नियुक्त वार्ताकारों को कोई सफलता नहीं मिली। हालांकि, अभी कोर्ट ने कोई बड़ा आदेश जारी नहीं किया। इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। कोर्ट ने कहा, अभी स्थिति सुनवाई लायक नहीं है।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पिछले 2 दिनों से जारी हिंसा मामले पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में है। हालांकि, जस्टिस केएफ जोसफ ने पुलिस को फटकार लगाई है। इस दौरान पुलिस ने जिस तरह से कार्रवाई की, उस पर नाराजगी जाहिर की। साथ ही कहा, जल्द ही स्थिति को काबू करें।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी वार्ताकारों की समिति
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क खाली करने के लिए प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए वकील साधना रामचंद्रन ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े की समिति बनाई थी। इस समिति ने प्रदर्शनकारियों से बात भी थी। इसके बाद वार्ताकारों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपी थी।
15 दिसंबर से ही विरोध प्रदर्शन हो रहा है
शाहीन बाग में 15 दिसंबर से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हैं। दिल्ली चुनाव में शाहीन बाग का मुद्दा जोरों पर था।
क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन विधेयक को 10 दिसंबर को लोकसभा ने पारित किया। इसके बाद राज्य सभा में 11 दिसंबर को पारित हुआ। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 12 दिसंबर को यह विधेयक कानून बन गया। इस कानून के मुताबिक, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता के लिए संबंधित शख्स 6 साल पहले भारत आया हो। इन देशों के छह धर्म के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता खुला। ये 6 धर्म हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी हैं।
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