
कुड्डलूर. तमिलनाडु के कुड्डलूर जिले के कल्लाकुरिची में 12th की छात्रा की संदिग्ध मौत(Kallakurichi Violence) के बाद चल रहे घटनाक्रम में कई नए मोड़ सामने आ रहे हैं। शुरुआत पड़ताल में सामने आया है कि पुलिस को 10 से अधिक बार अलर्ट किया गया था, बावजूद उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, SC ने बेटी के पोस्टमार्टम के लिए बनाई गई टीम में अपनी पसंद के डॉक्टर को शामिल करने की उसके पिता की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। बता दें कि कि प्राइवेट रेसिडेंसियल स्कूल में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा की 13 जुलाई को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। फैमिली ने उसकी बॉडी लेने से मना कर दिया था। वे अपनी पसंद के डॉक्टर से पोस्टमार्टम कराना चाहते थे। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो 27 जुलाई को कल्लाकुरिची पहुंचकर मामले की पड़ताल करेंगे। पढ़िए ताजा डिटेल्स...
पुलिस की लापरवाही सामने आई
17 तारीख को कल्लाकुरिची के पास स्कूल में दंगा भड़क गया था। जांच में खुलासा हुआ है कि खुफिया एजेंसी ने दंगों की आशंका को लेकर जिला पुलिस को 10 से ज्यादा बार अलर्ट किया था। खुफिया विभाग ने 15 जुलाई को चेतावनी दी थी कि स्कूल को नुकसान पहुंचाने के लिए छात्र संगठनों और अन्य संगठनों के शामिल होने की आशंका है। दंगे से 2 दिन पहले खुफिया अधिकारियों ने विल्लुपुरम और कल्लाकुरिची जिले के पुलिस अधिकारियों को सतर्क कर दिया था। लेकिन यह बात सामने आई है कि जिला पुलिस ने इस चेतावनी को महत्व नहीं दिया और इसे रूटीन मानकर उदासीन बनी रही। यह मामला अब जिला पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच विवाद का रूप ले चुका है। जिला पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि दंगे इसलिए हुए, क्योंकि उन्होंने खुफिया अलर्ट को गंभीरता से नहीं लिया और आलसीपन से काम लिया, उचित सावधानी नहीं बरती। इसके अलावा इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में खुफिया एजेंसी द्वारा दी गई रिपोर्ट को एसपी के ध्यान में उचित तरीके से लाया गया था या नहीं। हालांकि तमिलनाडु की द्रमुक सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कल्लाकुरिची के एसपी एस. सेल्वकुमार का ट्रांसफर कर दिया है। उनकी जगह पी. पकालावन को नियुक्त किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला
हालांकि जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने यह इस मामले को लेकर पीड़िता के पिता को हाईकोर्ट जाने और सारी जानकारी उनके संज्ञान में लाने की छूट जरूर दी है। SC ने सुनवाई के दौरान कहा-हमें स्वतंत्र विशेषज्ञों (पोस्टमार्टम करने के लिए) पर संदेह क्यों करना चाहिए? शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह या तो मामले को वापस ले लें या फिर मामले को खारिज कर दें। इस तरह मामले को वापस लेने के साथ उसे खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने हिंसक घटनाओं पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य के पुलिस प्रमुख को दंगाइयों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था।
पिता ने लगाया है साजिश का आरोप
पीड़िता के पिता 47 वर्षीय पिता रामलिंगम ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी चिन्नासलेम के कनियामूर में शक्ति मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा थी। जिस स्थान पर वह गिरी थी, वहां खून नहीं था। उसके और किसी के बीच संघर्ष के संकेत भी नहीं थे। हां, उसकी पूरी बॉडी पर चोट के निशान जरूर थे। स्कूल की दीवार पर खून के निशान थे। लड़की की 12 जुलाई को उसके छात्रावास में मौत हो गई थी।उसके कमरे से एक नोट मिला था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि स्कूल के दो शिक्षकों ने उसे प्रताड़ित किया। इससे वो सुसाइड कर रही है। पुलिस ने दो शिक्षकों सहित स्कूल के प्रिंसिपल, सेक्रेटरी समेत तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।
घर पर चिपकाना पड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
तमिलनाडु की सीबी-सीआईडी ने लड़की के घर के बाहर नोटिस चिपकाकर उसके परिवार को पोस्टमार्टम पूरा होने की सूचना दी। इसके साथ ही छात्रा का शव लेने के लिए बुलाया है। दरअसल, परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया था।
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