
नई दिल्ली। लद्दाख (Ladakh) केंद्र शासित प्रदेश में हायर स्टडीज के लिए केंद्रीय विवि (Central University) की नींव रखी जाएगी। यहां सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय (Sindhu Central University) खुलेगा। सिंधु नदी के नाम पर खुलने वाले इस विवि के लिए केंद्र सरकार ने विधेयक पास करा लिया है। लोकसभा में बृहस्पतिवार को ‘केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया गया जिसमें संघ राज्य क्षेत्र लद्दाख में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharamenra Pradhan) ने कहा कि लद्दाख में इस विश्वविद्यालय को बनाने का मूल उद्देश्य है कि यहां उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिल सके। 22 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने लद्दाख में सिंधु यूनिवर्सिटी बनाने पर अपनी मुहर लगाई थी।
भारी शोर-शराबे के बीच विधेयक पेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सदन में विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ‘केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया। इस दौरान, रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के सदस्य एन. के. प्रेमचंद्रन और कांग्रेस के मनीष तिवारी ने हंगामे के बीच विधेयक पेश किये जाने का विरोध किया। प्रेमचंद्रन ने कहा कि सदन में व्यवस्था बनने पर ही विधेयक पेश होना चाहिए। तिवारी ने कहा कि सदन में अव्यवस्था के बीच विधेयक पेश किया जाना असंवैधानिक है।
क्यों रखा गया नाम सिंधु सेंटल यूनिवर्सिटी?
लद्दाख में प्रस्तावित यूनिवर्सिटी का नाम सिंधु सेंट्रल यूनिवर्सिटी रखा गया है। विश्वविद्यालय का नाम सिंधु नदी के नाम पर रखा गया है। यह नदी भारत और पाकिस्तान दोनों में बहती है। केंद्र सरकार ने यूनिवर्सिटी के लिए जानबूझकर ऐसे नाम का चयन किया है जो न सिर्फ लद्दाख बल्कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान समेत पूरे जम्मू कश्मीर का भी प्रतिनिधित्व करे।
लद्दाख में 110 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित है विवि
लद्दाख में बनने वाला यह विश्वविद्यालय करीब 110 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा। स्थानीय प्रशासन ने विवि स्थापना के लिए करीब 110 एकड़ जमीन की पहचान कर ली है। यह जमीन लेह (Leh) और करगिल (Kargil) के बीच स्थित एक गांव खाल्टसी (Khaltasi) में है। इस विश्वविद्यालय को बनाने में 750 करोड़ रुपए की लागत आने की बात कही गई है।
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