
लखनऊ. विकास दुबे केस में एसआईटी ने बताया है कि 50 पुलिसकर्मियों की गैंगस्टर से सांठगांठ थी। 3,200 पेज की रिपोर्ट में से लगभग 700 पेज में पुलिस और विकास दुबे के बीच सांठगांठ का पता चला है। कुल 80 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 50 पुलिसकर्मी हैं।
सभी पुलिसवालों को मारने का था प्लान
रिपोर्ट में पता चला कि कैसे कुछ पुलिसकर्मियों ने विकास दुबे को उसके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। घटना के दिन (3 जुलाई) विकास दुबे को छापे के बारे में पहले से खबर दी गई थी। इतना ही नहीं अपने लोगों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि कोई भी पुलिसकर्मी घटनास्थल से जिंदा न बचे।
SIT जांच में 100 लोग शामिल थे
डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों पर कानपुर के चौबेपुर इलाके के बिकरू गांव में उस समय घात लगाकर हमला किया गया था, जब वे दुबे को गिरफ्तार करने जा रहे थे। एसआईटी ने अपनी जांच में लगभग 100 लोगों को शामिल किया था, जिसमें पुलिसकर्मी, बिकरू गांव के लोग, कानपुर के कई बाहर के पुलिस अधिकारी और व्यापारी शामिल थे।
कई सालों से पुलिस और विकास की सांठगांठ थी
कुछ को छोड़कर हर कोई कई सालों से विकास दुबे के साथ सांठगांठ किए हुए थे। एसआईटी ने इस मामले में 9 बिंदुओं पर जांच शुरू की थी। जांच के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया था लेकिन बाद में समय बढ़ा दिया गया, क्योंकि जांच का दायरा बढ़ गया था। एसआईटी ने पुलिस, राजस्व, आबकारी और जांच सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया था।
विकास दुबे उत्तर प्रदेश के कानपुर में मुठभेड़ में मारा गया था। विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ले जा रही पुलिस की गाड़ी पलटने के बाद मुठभेड़ शुरू हो गई थी और विकास ने भागने की कोशिश की थी। पुलिस ने कहा था कि विकास दुबे ने एक पुलिसवाले का हथियार छीन लिया और पुलिस पर गोलियां चलाईं। जवाबी फायरिंग में विकास दुबे को कुछ गोलियां लगीं। पुलिस उसे कानपुर अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था।
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