
मुंबई. भारत में महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है। देश के कुल केस के करीब 33% अकेले महाराष्ट्र में हैं। यहां सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई है। मुंबई के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। मुंबई का ये हाल है कि अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बेड तक नहीं बचे हैं। संक्रमित मरीजों की वेटिंग लिस्ट बनाई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोरोना के मरीजों के इलाज में लापरवाही के मामले में सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बंगाल को नोटिस जारी किया है। इसमें इन राज्यों के सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र में अब तक 3590 लोगों की हो चुकी मौत
अब तक महाराष्ट्र में कोरोना से सबसे ज्यादा केस मिले हैं। देश के कुल केसों के करीब 33% मामले यहीं मिले हैं। राज्य में कोरोना से अब तक 3590 लोगों की मौत हो चुकी है। कुल केस 97 हजार से अधिक मिले हैं। हालांकि, इनमें से 46 हजार लोग ठीक हो चुके हैं।
अस्पतालों की स्थिति
महाराष्ट्र के सबसे संक्रमित शहर मुंबई की स्थिति इतनी बदतर है कि यहां प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में अस्पताल खाली नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना अस्पतालों में मरीजों के लिए 9284 बेड हैं। वहीं, सरकारी और प्राइवेट अस्पातालों में 1094 आईसीयू बेड और 464 वेंटीलेटर्स हैं। आलम यह है कि सभी बड़े अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड नहीं हैं।
लग रही वेटिंग
अस्पताल में मरीजों को भर्ती कराने के लिए वेटिंग लग रही है। मरीजों से कहा जा रहा है कि वे अपना नाम और नंबर दें, बेड खाली होने पर उन्हें बता दिया जाएगा।
महाराष्ट्र में हर 10 लाख पर 5129 लोगों के टेस्ट हो रहे
महाराष्ट्र में अब तक 6,26,521 लोगों के टेस्ट हुए हैं। यानी हर 10 लाख पर यहां 5129 लोगों के टेस्ट हो रहे हैं। वहीं, तमिलनाडु में 6,55,675, दिल्ली में 2,71,516, गुजरात में 2,72,924, उत्तर प्रदेश में अब तक 4,20,669 टेस्ट हुए हैं।
शवों के साथ हो रहा है इलाज
इससे पहले भी मुंबई के बीएमसी अस्पतालों से ऐसे तमाम वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि अस्पतालों में जिस बार्ड में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं, शवों को भी रखा जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही वाले तमाम वीडियो सामने आ चुके हैं।
महाराष्ट्र में इतनी तेजी से क्यों फैला कोरोना?
- महाराष्ट्र में मुंबई देश के अन्य शहरों में सबसे ज्यादा संक्रमित है। इसका प्रमुख कारण शहर की घनी आबादी है। यहां हर एक किमी के दायरे में 32 हजार लोग रहते हैं। शहर में 600 स्क्वायर किमी में 1.5 करोड़ की आबादी रहती है।
- मुंबई देश की आर्थिक राजनीति है। इस वजह से मुंबई में अन्य देशों से विदेशी भी आते हैं। यहां से भी लोग विदेशों में जाते हैं। अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल मार्च-अप्रैल में मुंबई एयरपोर्ट पर 4.79 लाख अंतरराष्ट्रीय और 16.71 लाख घरेलू यात्रियों का आवागमन रहा था।
- इसके अलावा मुंबई में पहला केस 6 मार्च को मिला था। यहां 17 मार्च को आंशिक रूप से लॉकडाउन लगाया गया। लेकिन यहां लोकल ट्रेन और बसें चलती रहीं। लोग भीड़भाड़ वाले इलाके में सफर करते रहे। यहां 25 मार्च को लोकल ट्रेन और बसें बंद हुईं। इसके अलावा यहां सबसे घनी झुग्गी बस्ती में संक्रमण काफी तेजी से फैला।
प्रवासी मजदूरों और कोरोना के मुद्दे पर नाकाम हुए उद्धव ठाकरे
कोरोना को फैलने से रोकने में अब तक उद्धव सरकार नाकाम साबित हुई है। इसके अलावा महाराष्ट्र से ही सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों का पलायन हुआ है। केंद्र सरकार की एडवाइजरी के बावजूद राज्य की ओर से पलायन रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बावजूद इसके उल्टे मुख्यमंत्री मजदूरों को घर पहुंचाने की बात करते रहे। उद्धव सरकार मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए ट्रेनें चलाने की मांग करते रहे।
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