
रीवा. देश के लिए राहत की बात है कि कोरोना की दूसरी लहर में हर रोज संक्रमितों की संख्या कम हो रही है। राज्यों द्वारा लगाई गई पांबिदयां भी अनलॉक हो रही है जिस कारण से जीवन एक बार फिर से पटरी पर लौटने लगा है। लेकिन संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है। संक्रमण को लेकर सावधान रहने की जरूत है। संक्रमण से निपटने के लिए कोरोना को हराने वाले नीलेश (कप्तान) की कहानी को जरूर जानना चाहिए। कैसे सेल्फ मोटिवेशन आपकी जीत के लिए बहुत बड़ी सीढ़ी है।
Asianet News के पवन तिवारी ने कोरोना को हराने वाले नीलेश से बात की। उनकी उम्र 34 साल है और वो मध्यप्रदेश के रीवा जिले के रहने वाले हैं। नीलेश ने 26 अप्रैल को फीवर आने के बाद अपना टेस्ट कराया। उनकी पत्नी को भी हल्का बुखार था। दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। नीलेश ने कहा कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मुझे सबसे ज्यादा चिंता अपनी दोनों बेटियों की थी। डॉक्टर्स की सलाह में हम दोनों अलग-अलग कमरों में क्वारंटीन हुए और बच्चों को फैमली मेंबर्स ने संभाला। उन्होंने कहा कि कोरोना में कुछ विशेष बातों का ध्यान देना जरूरी है।
फोन और टीवी से बनाई दूरी
उन्होंने कहा कि टीवी और सोशल मीडिया में लगातार आॉक्सीजन की कमी, संक्रमितों की बढ़ती संख्या और मौत के आंकड़े डराने लगे थे। इसलिए मैंने सबसे पहले अपने कमरे का टीवी सात दिनों के लिए बंद किया और फोन से भी दूरी बना ली। पूरे दिन में मैं केवल एक से दो लोगों की कॉल रिसीव करता था। जिन लोगों से बात करने के बाद निगेटिव विचार आ सकते थे उनसे पूरी तरह से दूरी बना ली।
डॉक्टर के संपर्क में रहा
बुखार कम नहीं हो रहा था लगातार तीन दिन बुखार आने के बाद सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर ने सीटी स्कैन की सलाह दी। सीटी स्कैन की रिपोर्ट आई तो लंग्स में 20 फीसदी इन्फेक्शन था। थोड़ा डर जरूर लगा। लेकिन ये बात फैमली मेंबर से छुपाई और खुद को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार किया। केवल डॉक्टर्स से सलाह लेता रहा और दिन में दो से तीन बार काढ़ा पीता था।
कैसे किया मोटिवेट
संक्रमित होने के साथ-साथ लंग्स में इन्फेक्शन के कारण डर लग रहा था। ऐसे आॉक्सीजन और रेमेडिसिवर की शॉर्टज ने और बैचेन किया। लेकिन खुद को संभाला और बीमारी से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक किताबें पढ़ना शुरू किया। भरपूर नींद के बाद जब भी बॉडी को रिलैक्स लगता केवल किताबें पढ़ता। करीब 15 दिन के होम आइसोलेशन के दौरान तीन किताबें पढ़ा। संक्रमण का असला डर मुझे तब पता चला जब मैं खुद संक्रमित हुआ लेकिन मैंने ये डर कभी फैमली मेंबर्स के सामने नहीं आने दिया जिस कारण फैमली भी परेशान नहीं हुई।
'धीरे-धीरे तबीयत ठीक हुई'
धीरे-धीरे मेरी तबीयत ठीन होना शुरू हुई। मैं खुद ही महसूस करने लगा कि शरीर को भी आराम मिल रहा है। किताबें पढ़ने के कारण ध्यान ज्यादा बीमारी की तरफ नहीं गया। दिन में करीब तीन बार टैम्प्रेचर चेक करता, ऑक्सीजन लेवल भी नार्मल रहने लगा।
फोन में करता बच्चों से बात
बेटियों को देखकर कभी-खभी भावुक भी हो जाता था। लेकिन उन्हें बचाने के लिए उनसे दूर रहना जरूरी थी। बेटियों से फोन में बात करके कहता कि मैं ड्यूटी के काम में बिजी हूं फ्री हो जाऊंगा तब आपके पास आऊंगा। पत्नी की भी चिंता होती थी। हालांकि पत्नी की रिकवरी करीब 7 दिन में हो गई थी। जब पत्नी ठीक होकर बच्चों के पास पहुंची तो खुद की हिम्मत और बढ़ी।
10 मई को रिपोर्ट आई निगेटिव
10 मई को डॉक्टर की सलाह पर मैंने फिर से अपनी जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आने के दो दिन तक बच्चों से दूरी बनाकर रखा। जब मुझे लगने लगा मैं पूरी तरह से ठीक हूं तब मैं बच्चों के पास गया।
कोरोना से रिकवरी के बाद क्या किया
नीलेश ने कहा- कोरोना संक्रमित होने के बाद मैंने कुछ चीजें महसूस की। जिनमें से तीन सबसे ज्यादा जरूरी हैं।
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