
नेशनल डेस्क। देश की आजादी के बाद भारत से इतर मुसलमानों के लिए हमेशा से ही मोहम्मद अली जिन्ना एक नए और मुक्मल राष्ट्र का सपना देख रहे थे। वह कभी भी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते थे। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के साथ ही जिन्ना का मुसलमानों के लिए अलग देश का सपना पूरा हो गया था। हालांकि पाकिस्तान बनने के साथ ही उनकी मौत भी हो गई।
आज तक यह प्रश्न लोगों की जहन में है कि क्या मुस्लिम समुदाय के लिए पाकिस्तान बनाना जिन्ना का सही फैसला था। इस सवाल का जवाब या पाकिस्तान बनाने की क्या वजह थी, इसका जवाब भी जिन्ना के साथ ही दफन हो गया। जिन्ना हमेशा से ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखते थे भारत के नहीं।
गांधी जी ने कई बार ऑफर किया पीएम पद
चर्चा ये भी रही कि गांधी जी को जिन्ना के इरादों का पता चला तो उन्होंने भारत के टुकड़े होने से रोकने के लिए कई बार भारत का प्रधानमंत्री बनने का ऑफर दिया था लेकिन जिन्ना तैयार नहीं हुए। कहा जाते है कि नेहरू पीएम पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यदि नेहरू पीएम पद छोड़ देते तो पाकिस्तान न बनता।
जिन्ना इसलिए चाहते थे भारत का बंटवारा
हालांकि तथ्यों की बात करें तो नेहरू का इससे कोई लेनादेना ही नहीं था। जिन्ना क्योंकि भारत से इतर मुस्लिमों के लिए अलग राष्ट्र बनाना चाहते थे इसलिए वह कभी भी भारत का पीएम नहीं बनना चाहते थे। अमेरिकी इतिासकार स्टैनली वोल्पर्ट की किताब जिन्ना ऑफ पाकिस्तान में लिखा है कि जिन्ना का मानना था गांधी जी के स्वतंत्र भारत का मतलब है कांग्रेस राज। इसलिए वह चाहते थे हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का बंटवारा हो जाए।
कश्मीर पर किसने करवाया था हमला..
भारत और पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के साथ ही कश्मीर के राजा हरि सिंह भारत में शामिल हो गए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि जम्मू एवं कश्मीर पर कबाइलियों ने हमला कर दिया था। चर्चा ये है कि यह हमला भी जिन्ना ने कराया था। जबकि पाकिस्तान इससे इनकार करता है।
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