
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पराली जलाने की निगरानी वाली समिति बनाने के फैसले पर रोक लगा दी। समिति को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता में गठित किया गया था। दरअसल, कोर्ट ने केंद्र सरकार के आश्ववासन के बाद इसपर रोक लगाई है। केंद्र सरकार ने इस मामले को लेकर भरोसा दिलाया है कि वो तीन-चार दिनों में प्रदूषण से जुड़ा एक कानून लेकर आएगी। बता दें,यह कानून 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए' होगा।
बोबडे ने बताया स्वागत योग्य कदम
चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा- ये स्वागत योग्य कदम है। यह ऐसा विषय है जिस पर सरकार को जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, कोर्ट में दाखिल की गई याचिका की कोई बात नहीं है, एकमात्र मुद्दा ये है कि लोग प्रदूषण के कारण घुट रहे हैं, जिसपर जितना जल्दी अंकुश लग सके उतना जल्दी लगाना चाहिए। यह हमारी प्राथमिकता है कि दिल्ली-एनसीआर के लोगों को साफ हवा मिले। इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट की बात का समर्थन किया है।
केंद्र ने समिति पर रोक लगाने का किया आग्रह
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया था कि पराली जलाने की निगरानी के लिए जस्टिस मदन बी. लोकुर को नियुक्त करने वाले 16 अक्टूबर के आदेश पर रोक लगाई जाए। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र एक व्यापक योजना के साथ एक स्थायी निकाय स्थापित करने जा रहा है, जो पराली के नियंत्रण पर नजर रखेगी। तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 3-4 दिन में कानून ला रही है।
पंजाब-हरियाणा और यूपी में जल रही पराली
आपको बता दें कि चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमणियन की पीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले में सुनवाई की है। पिछली सुनवाई में अदालत ने पंजाब, हरियाणा और यूपी में पराली जलाने के लिए मॉनिटरिंग के लिए जस्टिस मदन बी लोकुर को एक सदस्यीय निगरानी समिति नियुक्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन तीनों राज्यों के चीफ सेक्रेटरी जस्टिस लोकुर को सहयोग करेंगे। ये समिति पराली जलाने की घटनाओं का खुद सर्वे करेगी।
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