Justice Yashwant Varma case: Justice Yashwant Varma के Delhi से Allahabad High Court ट्रांसफर के खिलाफ 6 हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने SC Collegium से मुलाकात कर चार प्रमुख मांगें रखीं। इसमें ट्रांसफर रद्द करने और क्रिमिनल जांच की मांग शामिल है।
Justice Yashwant Varma case: दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Varma) के इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ट्रांसफर के खिलाफ छह हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) से मुलाकात की। Collegium के चेयरमैन सीजेआई संजीव खन्ना (Chief Justice of India Sanjiv Khanna) ने प्रतिनिधियों को सुना और उनकी डिमांड्स पर विचार करने का भी आश्वासन दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (Allahabad High Court Bar Association) के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि उन्होंने चार प्रमुख मांगें रखीं जिसमें जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर को तुरंत रद्द करने के अलावा यह मांग किया कि जब तक जांच पूरी न हो, न्यायिक और प्रशासनिक कार्य न सौंपा जाए। जस्टिस के खिलाफ न्यायिक जांच हो। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (Criminal Investigation) शुरू हो। हालांकि, बार एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस लेने पर कोई फैसला नहीं लिया है।
जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले के आउटहाउस में होली के दिन जल चुके नोटों के बंडल (Burnt Cash) मिलने से यह मामला सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में In-House Inquiry शुरू की है। इस जांच कमेटी में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं।
SC द्वारा गठित इस कमेटी ने कार्रवाई करतें हुए कैश मिलने वाली जगह को सील कर दिया। इसके अलावा दिल्ली फायर सर्विसेस के चीफ अतुल गर्ग से पूछताछ की है। साथ ही कैश कांड के आरोपी जस्टिस वर्मा के घर का मुआयना करने के अलावा पूछताछ की है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर और उनके घर में जल चुके नोट मिलने की घटना दो अलग-अलग मुद्दे हैं। अदालत ने इस मामले की गंभीरता और न्यायपालिका की साख पर इसके प्रभाव को स्वीकार किया है।
इस विवाद पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। मंगलवार रात केंद्र सरकार ने विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा की। इसमें राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के अलावा कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना उद्धव गुट के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
इस मामले में दिल्ली पुलिस से जांच की मांग वाली याचिका भी SC में दायर की गई थी लेकिन सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।