
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सिंघु बार्डर को खाली कराने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए उच्चतम न्यायालय के पास कोई वजह नहीं है। याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। हाईकोर्ट वहां की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से डील करने में सक्षम है।
सुप्रीम कोर्ट में सोनीपत के दो लोगों ने अपनी याचिका में कहा था कि सड़क कई महीनों से बंद है इसलिए सुप्रीम कोर्ट सरकार से सड़क खोलने का निर्देश दे या फिर दूसरी सड़क बनाने का आदेश जारी करे, ताकि लोगों का आना जाना आसानी से होता रहे।
क्या कहा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने...
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, 'हमारे लिए इस मामले में दखल देने की कोई वजह नहीं है। जब हाई कोर्ट मौजूद हैं और वे स्थानीय परिस्थितियों के बारे में पूरा जानकारी रखते हैं कि आखिर क्या हो रहा है। हमें उच्च न्यायालय पर भरोसा करना चाहिए।'
कोर्ट ने कहा, 'याचिकाकर्ता को छूट है कि वह हाई कोर्ट में अर्जी दायर करे। उच्च न्यायालय भी आंदोलन की आजादी और मूलभूत सुविधाओं तक लोगों की पहुंच के मुद्दे को डील कर सकते हैं।'
न्यायाधीश ने कहा कि हाईकोर्ट आंदोलन व उससे जुड़े लोगों के अधिकार और अन्य लोगों के हकों के बीच संतुलन की बात कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने कमेंट के साथ ही यह आदेश दिया कि हाई कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अर्जी वापस ले लिया।
यह है मामला
सोनीपत के जयभगवान सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि इस आंदोलन के चलते शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग बंद है। याचिकाकर्ता के वकील अभिमन्यु भंडारी ने कहा कि सिंघु ब़ॉर्डर सोनीपत के लोगों की आवाजाही के लिए अहम है और इस आंदोलन के चलते उनके मूवमेंट के अधिकार पर रोक लग रही है। उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण आंदोलन के खिलाफ नहीं है, लेकिन सड़कों को बंद करने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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