
नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल के लिए नए लॉ ग्रेजुएट्स के लिए एनरोल्मेंट फीस तय कर दी है। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 750 रुपये और एससी/एसटी वर्ग के लिए 125 रुपये फीस निर्धारित की गई है। ऐसे में अब नए अधिवक्ताओं को बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए ज्यादा फीस नहीं चुकानी पड़ेगी।
कोर्ट में की गई थी राज्यों के बार काउंसिल की शिकायत
कुछ अधिवक्ताओं और लॉ ग्रेजुएट्स ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि कई राज्य बार काउंसिल मेंं रजिस्ट्रेशन के लिए मनमानी फीस वसूल रहे हैं। लॉ ग्रेजुएट्स ने याचिका में कहा है कि बार काउंसिल नए रजिस्ट्रेशन मोटी फीस वसूल रहे हैं। हर राज्य में अलग-अलग फीस ली जा रही जिससे नए लॉ ग्रेजुएट्स को दिक्कत हो रही है। बार काउंसिल ऑफ इंडियो को इसके खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए।
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20 से 40 हजार तक लगा रही थी एनरोलमेंट फीस
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में लॉ ग्रेजुएट्स ने कुछ राज्यों में बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन फीस का जिक्र करते हुए कम करने की मांग की थी। लॉ ग्रेजुएट्स ने कहा था राज्यों में बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए 20 से 40 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इनमें ओडिशा में लॉ ग्रेजुएट्स से बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन फीस 42,100 रुपये, गुजरात में 25,000 रुपये, उत्तराखंड में 23,650 रुपये, झारखंड में 21,460 रुपये और केरल में 20,050 रुपये ली जा रही है। यह अपने आप में कानून का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 अप्रैल को केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सभी स्टेट बार एसोसिएशंस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। नोटिस पर जवाब आने के बाद सुनवाई की गई जिसमें लॉ ग्रेजुएट्स की शिकायत को सही पाया गया था। कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार यानी आज कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया है।
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