
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शाहीन बाग में पिछले 63 दिनों से विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है। जिसके कारण सड़क जाम है और लोगों को तमाम असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। शाहीन बाग का रास्ता खुलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। जिस पर कोर्ट सुनवाई कर रहा हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने इस विवाद का हल बातचीत से निकालने के लिए संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को वार्ताकार नियुक्त किया है।
जिसके बाद दोनों वार्ताकार प्रदर्शनकारियों से बात करने बुधवार को शाहीन बाग पहुंचे और तकरीबन दो घंटे तक बातचीत की। लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिसके बाद गुरुवार को वार्ताकार फिर बात करेंगे। इन सब के बीच वार्ताकारों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए बातचीत के दौरान एक प्रदर्शनकारी महिला का दर्द छलका और उसने अपनी बात सामने रखी...
हिंदू महिला का कुछ यूं छलका दर्द-
वार्ताकारों के सामने माइक थामते हुए एक महिला ने कहा, "मैं हिंदू हूं और इस कानून का विरोध कर रही हूं। लेकिन जो लोग कानून लेकर आए वो हमें कह रहे महिलाएं 500 रुपए लेकर बैठी हैं। क्या आपको लग रहा है हम 500 रुपए लेकर बैठ रहे हैं।" इसके साथ ही महिला ने कहा, "सर्दी आई बरसात हुआ लेकिन हम डटे रहे।"
महिला ने आगे कहा, "अफवाह फैलाई जा रही है कि हम बिरयानी खा रहे हैं, लेकिन हम भुगतान तो नहीं कर रहे हैं, हम तो प्रोटेस्ट कर रहे हैं और डटे रहेंगे। जो बिरयानी खाते है वो बिरयानी खाएंगे जो रोटी खाते है रोटी खाएंगे...हमें बदनाम किया जा रहा है। उन्हें शर्म आनी चाहिए।"
महिला ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "दूसरी बात की हम यहां लड़ रहे हैं लेकिन भाषा देखिए, हम यहां लड़ रहे हैं यहां अनपढ़ लोग भी है और पढ़े लिखे लोग भी है, लेकिन हम दिल की गहराई से लड़ रहे हैं। किसी भी प्रोटेस्टर की भाषा खराब नहीं है। जो बिल लेकर आए उनकी भाषा देखिए उन्होंने इसे मिनी पाकिस्तान कहा, यहां हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी है, सिख है और ईसाई भी है उनको समझ आना चाहिए कि ये मिनी पाकिस्तान नहीं यह हिंदुस्तान है। ऐसा हिंदुस्तान कहीं नहीं देखा होगा।"
"जो सत्ता में बैठे हैं उन्होंने हमारे दिलों में जहर घोलने की बहुत कोशिश की। लेकिन मोदी जी का धन्यवाद है जो वो सीएए लेकर आए। लेकिन हमने बता दिया कि हम बंटे हुए नहीं है, हमारे दिलों में जहर नहीं है।"
कोर्ट ने कहा था, अपनी बात रखने का अधिकार है...
बातचीत के दौरान साधना रामचंद्रन ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी को विरोध करने का अधिकार है। नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। लेकिन हमारे जैसा ही लोगों के पास सड़कों का इस्तेमाल करने और अपनी दुकान खोलने का अधिकार है। पिछली सुनवाई में जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने कहा, लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि वे रास्ता बंद कर दें। ऐसे में हर कोई प्रदर्शन कर रास्ता रोकने लगेगा।
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