
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं की तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि देश अभी नाजुक दौर से गुजर रहा है। जब हिंसा थमेगी, तब याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।
हमारा काम वैधता जांचना है
चीफ जस्टिस ने कोर्ट में दायर याचिकाओं पर आश्चर्य जताते हुए कहा, ‘‘पहली बार है जब कोई देश के कानून को संवैधानिक करार देने की मांग कर रहा है, जबकि हमारा काम वैधता जांचना है।’’ बेंच में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे। उनके मुताबिक, ‘‘यह कोर्ट का काम है कि वह किसी कानून की वैधता की जांच करे। जब हिंसा का दौर थम जाएगा, तब कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करेंगे।’’
कोर्ट से की थी यह मांग
यह मामला तब सामने आया, जब एडवोकेट विनीत ढांडा ने एक याचिका दायर करते हुए उसकी जल्द सुनवाई की मांग की थी। याचिका में कहा कि सीएए को वैध घोषित किया जाए। साथ ही राज्यों को भी निर्देश दिए जाएं कि वे कानून को लागू करें। याचिका में यह भी कहा गया कि अफवाहें फैलाने के लिए कार्यकर्ताओं, छात्रों और मीडिया पर भी कार्रवाई की जाए।
यूपी, कर्नाटक और दिल्ली में हुआ था हिंसक प्रदर्शन
दिसंबर में केंद्र सरकार द्वारा संसद में नागरिकता संशोधन बिल लाया गया था। जिसे दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई थी। जिसके बाद से इस संशोधन कानून का पूर्वोत्तर समेत देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए। इस दौरान 21 लोगों की जान गई। गौरतलब है कि 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और असम में हिंसक प्रदर्शन हुए। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी।
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