
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल पब्लिक रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इसे लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही कोर्ट ने इस याचिका पर नागरिकता कानून के खिलाफ पहले से दायर याचिकाओं के साथ सुनवाई करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, इसमें नागरिकता कानून और एनपीआर को चुनौती दी गई है।
क्या है NPR?
एनपीआर का पूरा नाम नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है। नाम से ही जाहिर है कि इसमें पॉपुलेशन को लेकर रिकॉर्ड बनाए जाएंगे। एनपीआर के तहत 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देश में घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। एनपीआर में दर्ज जानकारी लोगों द्वारा खुद दी गई सूचना पर आधारित होगी।
क्या है NPR का मकसद?
जनसंख्या रजिस्टर या एनपीआर का मतलब है कि इसमें किसी गांव या कस्बे से लेकर शहरी क्षेत्र तक सभी लोगों का विवरण शामिल होगा। इसका मकसद देश में रह रहे नागरिकों का समग्र डेटाबेस तैयार करना है। यह डेटाबेस जनसांख्यिकीय और बायोमीट्रिक आधार पर तैयार होगा।
क्या है नागरिकता कानून?
भारत में पिछले साल के आखिरी में नागरिकता कानून पास हुआ था, इस कानून के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले प्रताड़ित हिंदू, सिख, पारसी, बौद्ध, जैन और ईसाइयों को नागरिकता देने का प्रावधान है।
इस कानून के विरोध में भारत के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश, प बंगाल, असम, दिल्ली में कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन भी देखने को भी मिले।
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