
नई दिल्ली. भारत सरकार को बड़ा झटका लगा है। थाइलैंड ने दाऊद इब्राहिम के बड़े गैंगस्टर मुन्ना झिंगड़ा को भारत को सौंपने से इनकार कर दिया। झिंगड़ा वहां अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की हत्या की कोशिश में 16 साल से सजा काट रहा है। थाइलैंड की अदालत ने निचली अदालत के 2018 के फैसले को बदल दिया, इसमें झिंगड़ा को भारतीय नागरिक बताया गया था और भारत को प्रत्यपर्ण की मंजूरी दी गई थी।
भारतीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने इस फैसले नाराजगी जाहिर की। उन्होंने यह भी कहा कि जब फिंगरप्रिंट, डीएनए का सैंपल, लिविंग सर्टिफिकेट और मुंबई में दर्ज एफआईआर की कॉपी अदालत को सौंप दी गई थी, इसके बाद इस तरह का फैसला आया।
भारत को उम्मीद थी कि झिंगड़ा के प्रत्यर्पण से दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में मौजूद होने की पुष्टि हो जाती। खुफिया सूत्रों कहा कहना है कि पाकिस्तान ने थाईलैंड में मौजूद आईएसआई के सूत्रों के प्रभाव का इस्तेमाल किया, जिससे उसके पक्ष में फैसला आ सके। थाईलैंड में आईएसआई की सफलता हमारे लिए एक झटका है।
झिंगड़ा की आईएसआई ने की थी मदद
सूत्रों ने बताया, गैंग में झिंगड़ा आईएसआई की मदद से था। आईएसआई ने ही उसका पाकिस्तान का नकली पासपोर्ट बनाया और उसमें उसका नाम मोहम्मद सलीम रखा। उसे छोटा राजन को मारने के लिए भेजा गया था। पाकिस्तान के दूतावास ने उसकी सुरक्षा में मदद की थी।
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