
नई दिल्ली. आज महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों को लेकर जारी सस्पेंस खत्म हो गया। चुनाव आयोग ने विधानसभा के चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया। महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को चुनाव होंगे और 24 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुनील अरोड़ा मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार का कार्यकाल 2 और 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। आयोग ने कहा कि उम्मीदवारों को 30 दिन में हिसाब देना होगा।
25 साल में पहले बार अलग हुई थी बीजेपी और शिवसेना
2014 में हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए चुनाव में हरियाणा की 90 में से 47 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। यह पहला मौका ता जब हरियाणा में बीजेपी को अपने दम पर बहुमत मिला था और मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई में वहां सरकार बनी। महाराष्ट्र में साल 2014 में बीजेपी 122 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति न बनने के बाद 25 साल में पहली बार शिवसेना और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया था। हालांकि, दोनों में से किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और चुनाव बाद दोनों दलों ने फिर से गठबंधन कर सरकार बनाई। देवेंद्र फडणवीस सीएम बने थे। इस चुनाव में शिवसेना ने कुल 63 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस के खाते में 42 और एनसीपी के खाते में 41 सीटें रही थीं।
'एनसीपी और कांग्रेस इस बार साथ चुनाव लड़ेंगे'
मौजूदा सियासी समीकरण की बात करें तो प्रदेश में एनसीपी और कांग्रेस इस बार साथ मैदान में उतरने वाले हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था लेकिन इस बार दोनों दल 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए सहमत हुए हैं। वहीं, बीजेपी और शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बन जाएगी। सूत्रों के मुताबिक 126 सीटों पर शिवसेना, 144 सीटों पर बीजेपी और 18 सीटों पर अन्य सहयोगी पार्टियां चुनाव लड़ सकती हैं।
हरियाणा में पहली बार अपने दम पर जीती थी बीजेपी
हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल 2 नवंबर को खत्म हो रहा है। पिछले विधानसभा यानी 2014 में यहां बीजेपी ने 90 में से 47 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। यह पहला मौका था जब बीजेपी ने अपने दम पर राज्य में सत्ता कायम की थी। वहीं, भजनलाल के बाद दूसरी बार प्रदेश को मनोहर लाल खट्टर के रूप में गैर-जाट सीएम मिला था। इस चुनाव में दूसरे नंबर पर आईएनएलडी रही, जिसे 19 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस 15 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही। वहीं अन्य उम्मीदवारों ने 9 सीटों पर जीत मिली।
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