
नई दिल्ली. भारतीय किसान संगठन के नेतृत्व में हजारों किसानों ने किसानों-मजदूरों की समस्याओं को लेकर आज नोएडा से दिल्ली तक कूच कर दिया। अपनी 15 सूत्रीय मांगों को मोदी सरकार के सामने रखने के लिए हजारों की संख्या में ये किसान सहारनपुर से पैदल यात्रा करते हुए आ रहे हैं। नोएडा से दिल्ली की तरफ आ रहे किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में है। बता दें कि दिल्ली पुलिस पूरी तरह से तैयार है कि वह किसानों को दिल्ली जाने से रोक सकें। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अपने जवान तैनात कर दिए हैं। सीआरपीएफ के जवानों को भी यहां लगाया गया है।
यह है किसानों की प्रमुख मांगें
1. सभी किसानों का कर्जा पूरी तरह माफ हो।
2. किसान-मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5,000 रुपये महीना पेंशन दी जाए।
3. किसान-मजदूरों को शिक्षा और स्वास्थ्य मुफ्त दिया जाए।
4. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त दी जाए।
5. फसलों के दाम किसान प्रतिनिधियों की उपस्थिति में तय किए जाएं।
6. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट और एम्स की स्थापना हो।
7. किसान के साथ उसके परिवार को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिले।
8. आवारा गोवंश पर प्रति गोवंश गोपालक को 300 रुपये प्रतिदिन मिलें।
9. खेती कर रहे किसानों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा दिया जाए।
10. किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज समेत जल्द किया जाए.
11. भारत में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो।
12. समस्त दूषित नदियों को प्रदूषण मुक्त कराया जाए।
सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग
भारतीय किसान संगठन के उपाध्यक्ष राधे ठाकुर ने बताया कि सहारनपुर से दिल्ली के लिए निकली 'किसान-मजदूर यात्रा' में हजारों किसान शामिल हैं। सहारनपुर से दिल्ली के किसान घाट तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में किसानों की हालत दयनीय है और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखे सो रही है। उन्होंने कहा कि समय से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा। योगी सरकार बिजली की दर बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ रही है और कर्ज के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। इसी के चलते देश के किसान को दिल्ली पैदल आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जब तक किसानों की मागों के बारे में सरकार कोई ठोस आश्वासन नहीं देती तब तक किसान दिल्ली छोड़ने वाले नहीं हैं। भले ही हमें जितने दिनों तक दिल्ली में पड़ाव करना पड़े।
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