बाप साबित होने के डर से सैनिक ने की मां-बच्चों की हत्या, 19 साल बाद यूं पकड़ाया

Published : Jan 05, 2025, 07:35 AM ISTUpdated : Jan 05, 2025, 07:36 AM IST
Crime News

सार

सेना के दो जवानों ने एक महिला और उसके जुड़वा बच्चों की हत्या कर दी और 19 साल तक फरार रहे। DNA टेस्ट के डर से किया गया ये खौफनाक कांड आखिरकार पकड़ा गया।

नई दिल्ली। सेना के जवान रहे एक व्यक्ति ने साथी सैनिक की मदद के 24 साल की महिला की हत्या कर दी। दोनों ने महिला के 17 दिन के जुड़वा बच्चों को भी मार डाला। जवान को शक था कि बच्चों का बाप कौन है यह पता करने के लिए DNA टेस्ट हुआ तो साबित हो जाएगा कि बच्चे उसके हैं।

इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद दोनों ने सेना छोड़ दी और छिपकर रहने लगे। दोनों ने शादी कर ली। उनके बच्चे भी हुए। 19 साल तक वे पुलिस की पकड़ में आने से बचते रहे, लेकिन एक गुप्त सूचना के लीक होने के बाद उनके हाथों में हथकड़ी लग गई।

10 फरवरी 2006 को हुई थी महिला की हत्या

महिला की हत्या 10 फरवरी 2006 को हुई थी। केरल के कोल्लम जिले के आंचल के येरम में महिला किराये के घर में रहती थी। यहीं उसे और उसके दो बच्चों को मार डाला गया था। रजनी की मां जुड़वा बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र लेने के लिए पंचायत भवन गई थी। लौटी तो देखा कि घर में बेटी और उसके बच्चों के शव हैं।

जांच हुई तो पता चला कि दिबिल कुमार बी नाम का 28 साल का युवक महिला के साथ रिलेशनशिप में था। दिबिल सेना के 45 एडी रेजिमेंट में था और पठानकोट में तैनात था। 24 जनवरी 2006 को जुड़वा बच्चों का जन्म होने के बाद वह महिला से दूरी बनाने लगा था। इसके बाद अविवाहित मां केरल राज्य महिला आयोग के पास गई थी। आयोग ने जुड़वा बच्चों का पिता कौन है इसकी जांच कराने का आदेश दिया था। यह बात दिबिल कुमार को मंजूर नहीं थी। उसने महिला की हत्या की साजिश रचनी शुरू कर दी।

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार राजेश पी (जो उस समय 33 साल का था) दिबिल कुमार के साथ उसी रेजिमेंट में था। दोनों की अच्छी दोस्ती थी। उसने दिबिल की साजिश के अनुसार रजनी और उसकी मां से दोस्ती की। उसने आश्वासन दिया कि दिबिल को रजनी से विवाह करने के लिए मनाएगा, लेकिन यह दोनों की महिला और उसकी जुड़वा बेटियों की हत्या की साजिश का हिस्सा था। दोनों ने मौका मिलते ही महिला और उसके बच्चों को मार डाला और भाग गए।

हत्याकांड को अंजाम देकर भाग गए थे दिबिल कुमार और राजेश

हत्याकांड को अंजाम देकर दिबिल कुमार और राजेश फरार हो गए। काफी तलाश के बाद भी पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई तो मार्च 2006 में सेना ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। पुलिस ने दोनों के सिर पर 2 लाख रुपए का इनाम रखा। कहा कि इनके बारे में सूचना देने वाले के 2 लाख रुपए मिलेंगे। इसके बाद भी दोनों का पता नहीं चला। 2010 में केरल हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया, लेकिन यह सीबीआई के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हुई।

नाम बदला, नए दस्तावेज बनाए, शुरू की नई जिंदगी

सालों की तलाश के बाद सीबीआई को सूचना मिली कि दिबिल कुमार और राजेश फर्जी नामों से पुडुचेरी में रह रहे हैं। इन्होंने आधार कार्ड सहित नए दस्तावेज भी बनवा लिए हैं। दोनों ने दो शिक्षिकाओं से शादी की थी। उनके बच्चे भी हैं। निगरानी के बाद सीबीआई की चेन्नई इकाई ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें कोच्चि ले आई। उन्हें शनिवार को एर्नाकुलम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। दोनों को 18 जनवरी तक के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया है। सीबीआई भी उन्हें अपनी हिरासत में लेगी।

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