एक सैल्यूट तो बनता इन बच्चों के लिए...मौत के बाद कई परिवारों की झोली खुशियों से भर दी, एक तो महज 18 महीने की

Published : Nov 13, 2022, 10:54 PM IST
एक सैल्यूट तो बनता इन बच्चों के लिए...मौत के बाद कई परिवारों की झोली खुशियों से भर दी, एक तो महज 18 महीने की

सार

एम्स के डॉक्टर्स की मानें तो अभी भी ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों में अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी है। अधिकतर बार परिवार के सीनियर मेंबर्स ही अंगदान से इनकार करते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में जागरूकता आई है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो भारत में प्रति मिलियन अंगदान दर 0.4 है।

'Little' organ donors: जो बड़ों को करना चाहिए वह दो मासूम बच्चों ने करके एक नजीर पेश कर दी है। मौत के बाद दो बच्चों ने ऐसा काम कर दिया जिससे कई परिवारों की झोली खुशियों से भर गई। ब्रेन डेड दो बच्चों के कई अंग अब दूसरे जरूरतमंदों के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया गया है जिससे कई लोगों का नया जीवनदान मिला है। इन बच्चों की वजह से आधा दर्जन से अधिक परिवारों में खुशियां लौट आई है। 

महज 18 महीने की बच्ची के अंगों से चार जिंदगियां रोशन

यूपी के मथुरा की 18 महीने की बच्ची मानसी किसी ऊंचाई से नीचे गिर गई थी। बच्ची को काफी गंभीर चोटें आई थी। डॉक्टर्स ने लाख कोशिशें की लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका। घटना दो नवम्बर ही है। एम्स दिल्ली के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ.दीपक गुप्ता ने बताया कि बच्ची के माता-पिता की सहमति से उसका अंगदान कराया गया। इस बच्ची की वजह से चार बच्चों के जीवन में नया सवेरा आया है और इन चारों का घर खुशियों से सराबोर है। डॉ.दीपक गुप्ता ने बताया कि बच्ची मानसी की लीवर व किडनी को पांच साल की एक बच्ची को ट्रांसप्लांट किया गया। दूसरी किडनी 12 साल की उम्र के एक बच्चे को दी गई, जो पांच साल से पेरिटोनियल डायलिसिस पर था और परिवार में कोई उपयुक्त डोनर नहीं था। एम्स में उनका इलाज चल रहा था। एम्स ने बताया कि मानसी के कॉर्निया और हृदय के वाल्व को अन्य बच्चों में इस्तेमाल के लिए संरक्षित कर लिया गया है।

छह साल की बच्ची रोली के भी अंग कई बच्चों के लिए जीवनदायिनी

एम्स के डॉ.दीपक गुप्ता ने बताया कि अप्रैल महीने में छह साल की बच्ची रोली भी इलाज के लिए लायी गई थी। रोली प्रजापति बंदूक की गोली लगने से ब्रेन डेड हो गई थी। उसके माता-पिता की सहमति के बाद उसके हृदय, दोनों किडनी, कार्निया और लीवर का अंगदान किया गया। इस बच्ची की वजह से भी कम से कम चार बच्चों के जीवन में नई रोशनी आई। 

लोग अंगदान के लिए हो रहे हैं राजी

एम्स के डॉक्टर्स की मानें तो अभी भी ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों में अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी है। अधिकतर बार परिवार के सीनियर मेंबर्स ही अंगदान से इनकार करते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में जागरूकता आई है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो भारत में प्रति मिलियन अंगदान दर 0.4 है। यह रेट दुनिया में सबसे कम है। संयुक्त राज्य अमेरिका और स्पेन में वर्तमान में 50 प्रति मिलियन जनसंख्या अंगदान दर है। अमेरिका ने सितंबर में 10 लाख अंगदान पूरे किए।

डॉ.दीपक गुप्ता बताते हैं कि नए नेतृत्व के तहत एम्स दिल्ली ने हाल के दिनों में अंग खरीद गतिविधियों में बदलाव किए हैं जिसके परिणामस्वरूप पिछले छह महीनों में अंगदान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष एम्स दिल्ली में चौदह अंगदान हुए हैं जो 1994 के बाद सबसे अधिक हैं।

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