
नई दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने शनिवार को हिंदी को चौतरफा बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के साथ ही देश के सभी उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिये संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए।
न्यायालय, उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषाओं का हो उपयोग
लोकशक्ति जनशक्ति पार्टी नेता ने यहां संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि 1950 में जब संविधान को अंगीकार किया गया था तब अंग्रेजी को कामकाजी भाषा के तौर पर सिर्फ 15 वर्षों के लिये सेवा में माना गया था लेकिन उसका यह दर्जा अब भी बरकरार है जबकि हिंदी जिसे आधिकारिक भाषा बनाया गया था उसकी अनदेखी हुई।उन्होंने कहा कि भाषा लोगों के जन्म स्थान और आसपास के माहौल से जुड़ी है और अंग्रेजी भारतीयों पर थोपी गई है।हिंदी भाषा की इजाजत अभी सिर्फ उच्च न्यायालयों में होने का जिक्र करते हुए पासवान ने कहा कि अंग्रेजी सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक होनी चाहिए।
(यह खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की है। एशियानेट हिंदी की टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है
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