
नई दिल्ली. दिल्ली एम्स के सर्वर पर साइबर अटैक के बाद गुरुवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के twitter हैंडल को हैक करने का मामला सामने आया है। मामला सामने आते ही सिक्योरिटी एजेंसी और साइबर एक्सपर्ट जांच में जुट गए। बता दें कि एम्स दिल्ली, देश के सबसे बड़े अस्पतालों में एक है। 23 नवम्बर को उसके सर्वर को हैक कर लिया गया था। हैकर्स ने दिल्ली एम्स के अधिकारियों से 200 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। हालांकि एम्स मैनेजमेंट ने इससे इनकार किया था। बाद में डोटा रिकवर कर लिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने गुरुवार सुबह केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय का ट्विटर हैंडल हैक कर लिया था। हालांकि बाद में उसे रिकवर कर लिया गया। एम्स के सर्वर को हैक करने की घटना के बाद केंद्रीय मंत्रालय एक्शन में आया था। मंत्रालय ने 29 नवंबर की देर शाम हाईलेवल मीटिंग की थी। इसमें आईबी, एनआईए, पुलिस के अलावा एनआईसी व एम्स के अधिकारी शामिल हुए थे। एक सप्ताह से एम्स का सर्वर बंद पड़ा हुआ था। उसे 23 नवम्बर को हैक किया गया था। हैकर्स ने दिल्ली एम्स के अधिकारियों से 200 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसका खंडन किया था।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि हैकर्स ने कोई मांग नहीं की है। यह सरासर अफवाह है कि हैकर्स ने फिरौती के तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में 200 करोड़ रुपये मांगे। एम्स दिल्ली, देश के सबसे बड़े अस्पतालों में एक है। इस मामले में एम्स प्रशासन ने दो सिस्टम एनालिस्ट को सस्पेंड किया था। एम्स प्रशासन का दावा किया था कि हैक किया हुआ डेटा रिकवर हो गया है। हालांकि, सबकुछ सामान्य होने में 3-4 दिन का समय लगने की बात कही थी।
दिल्ली एम्स का सर्वर हैक होने के मामले में राजधानी पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने 25 नवंबर को जबरन वसूली और साइबर आतंकवाद का मामला दर्ज किया है। हालांकि, इस मामले की जांच में एनआईए भी शामिल हो गई है। जांच टीम में इंडिया कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-आईएन), दिल्ली पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और मंत्रालय शामिल हैं। बता दें कि एम्स में हर साल करीब 38 लाख मरीजों का इलाज होता है।
बता दें कि सुरक्षा हैकर (security hacker) अथवा हैकर नेटवर्क अथवा कंप्यूटर सिस्टम की कमी को समझते हुये उसमें सेंध लगाकर अपने हिसाब से फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। साइबर अटैक सिर्फ पैसों के लिए भर नहीं होता, यह आतंकी गतिविधियों, दंगे कराने, लोगों को भड़काने आदि में भी इस्तेमाल होते हैं। साइबर एक्सपर्ट मानते हैं कि भारत में रोज करीब करीब 47 हजार साइबर अटैक होते हैं। अगर दूसरे देशों की बात करें ,तो नॉर्थ कोरिया, चीन, वेस्ट एशियन देशों से सबसे ज्यादा साइबर अटैक के मामले सामने आते हैं।
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