
लखनऊ. यूपी के कानपुर के बर्रा से लैब टेक्नीशियन की हत्या का मामला सामने आया है। टेक्नीशियन को 31 दिन पहले अगवा किया गया था। लेकिन पुलिस समय रहते उसे नहीं बचा पाई। इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन डिप्टी एसपी मनोज गुप्ता समेत चार अफसरों को निलंबित कर दिया।
डिप्टी एसपी के अलावा, आईपीएस अपर्णा गुप्ता, पूर्व प्रभारी निरीक्षक थाना बर्रा रणजीत राय और चौकी इंचार्ज राजेश कुमार को भी लापरवाही के मामले में निलंबित किया गया है।
क्या है मामला?
22 जून को कानपुर के बर्रा थाना क्षेत्र में रहने वाले लैब टेक्नीशियन संजीत यादव लापता हो गया था। वह लैब से घर आने के लिए शाम तकरीबन 7 बजे निकला था लेकिन घर नहीं पहुंचा। जिसके बाद परिजनों ने बर्रा थाने में 23 जून को गुमशुदगी दर्ज कराई। लेकिन पुलिस ने इस मामले में कुछ खास फोकस नहीं किया। फिर 29 जून को फिरौती की काल आई और परिजनों से संजीत को छोड़ने के एवज में 30 लाख मांगे।
फिरौती भी लेकर फरार हुए बदमाश
इसके बाद पुलिस ने एक प्लान बनाया। पुलिस ने घरवालों से कहा कि 30 लाख रुपए लेकर अपहरणकर्ताओं के पास जाएं। जहां सादे कपड़े में मौजूद पुलिसकर्मी बदमाशों को गिरफ्तार कर लेंगे। लेकिन पुलिस का यह प्लान फेल हो गया और बदमाश फिरौती लेकर फरार हो गए। पुलिस उन्हें सिर्फ देखती रह गई। यह पैसे परिवार ने बेटी की शादी के लिए रखे गहने और मकान बेंचकर इकट्ठे किए थे।
ऐसे हुआ खुलासा
गुरूवार देर रात पुलिस ने संजीत के 4 दोस्तों को पकड़ा तो पूरा मामला सामने आ गया। ये सभी संजीत के साथ अन्य पैथोलॉजी में काम कर चुके हैं। इन्होने ही संजीत का अपहरण किया था। संजीत ने 26 जून को इनके चंगुल से भागने का प्रयास किया था जिसके बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर पांडु नदी में शव को बहा दिया था।
'मेरे भाई की हत्यारी है पुलिस मेरे साथ गेम खेलती रही'... 30 लाख की फिरौती के बाद भी हो गई हत्या
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