
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश मदरसा एक्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किए जाने का आदेश दिया था। फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। इस मामले में जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार से जवाब भी मांगा है।
17 लाख छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा एक्ट रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल स्टेल लगा दिया है। उत्तर प्रदेश में करीब 16000 मदरसे होंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में स्टे मिलने से प्रदेश के 17 लाख मदरसा छात्रों को राहत मिल गई है। इसके साथ ही यह आदेश भी जारी किया है कि जब तक कोई फैसला नहीं आ जाता है तब तक मदरसों में पहले की तरह पढ़ाई चलती रहेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा मामले में सुनवाई पर ये कहा
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा एक्ट रद्द करने के मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट ने मदरसा एक्ट के प्रावधानों को समझने में थोड़ी भूल की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये मानना कि एक्ट धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध है, गलत होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की ओर से यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असंवैधानिक करार देने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है।
मदरसा बोर्ड पक्ष के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट का अधिकार नहीं बनता कि वह इस एक्ट को रद्द करे। हाईकोर्ट के इस फैसले से 17 लाख छात्रों के जीवन पर असर पड़ा है। इसके साथ ही करीब 25000 मदरसे भी प्रभावित हुए हैं। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने अब यूपी सरकार स्पष्टीकरण देगी।
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