
बांदा, यूपी. सारी तिकड़में फेल होने के बाद आखिरकार यूपी के बाहुबली मुख्तार अंसारी को योगी सरकार के आगे घुटने टेक देने पड़े। उसे कानूनी प्रक्रिया के बाद बुधवार तड़के करीब 4.30 बजे पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया। यूपी पुलिस उसे रोपड़ जेल से मंगलवार दोपहर करीब 2.20 बजे लेकर रवाना हुई थी। बुधवार तड़के करीब 4.34 बजे उसे बांदा जेल शिफ्ट कर दिया गया। मुख्तार को कड़ी सुरक्षा में रोपड़ जेल से बांदा जेल तक लाया गया। इस दौरान 10 गाड़ियों के काफिले में 150 पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे।
अपडेट मामला
इस बीच खबर है कि यूपी सरकार अंसारी की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने कानूनी सलाह ले रही है। बता दे कि मुख्तार अंसारी पिछले 24 साल से लगातार विधायक है। यूपी सरकार अंसारी की विधानसभा से सदस्यता खत्म कराने कानूनी राय ले रही है। कानून के मुताबिक, अगर कोई सदस्य 60 दिन तक सदन से नदारद रहता है, तो आर्टिकल 190 के तहत उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है। इसी को यूपी सरकार आधार बनाएगी। मुख्तार पर यूपी में 52 केस दर्ज हैं। इनमें 15 ट्रायल स्टेज पर हैं। इस पर भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का भी आरोप था। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी, जिसमें मुख्तार बरी हो गया था।
14 घंटे में तय किया 882 किमी का सफर
बांदा जेल के अंदर मुख्तार की एम्बुलेंस और सुरक्षा गाड़ी को ही दाखिल होने दिया गया। यहां मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा गठित 4 डॉक्टरों की टीम ने उसका मेडिकल परीक्षण किया। फिर सामान की तलाशी ली गई। यह प्रक्रिया करीब आधे घंटे चली। इसके बाद उसे बैरक नंबर-15 भेज दिया गया। बता दें कि 26 महीने बाद मुख्तार को यूपी सरकार वापस अपनी जेल में लेकर आई है। पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल तक के सभी जिलों में अलर्ट घोषित किया गया था।
उल्लेखनीय है कि मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से बसपा के सांसद अफजाल अंसारी ने इस मामले में यूपी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बांदा जेल में मुख्तार को चाय में जहर देकर मारने की कोशिश हो चुकी है। हालांकि उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया।
यह भी जानें
मुख्तार को रोपड़ जेल से यूपी पुलिस को हैंडओवर करने से पहले उसकी कोरोन जांच की गई। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू की गई। यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने एक सावर्जनिक रैली में यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि मुख्तार की गाड़ी यूपी के बार्डर में पलट सकती है। गैंगस्टर विकास दुबे की तरह यह गाड़ी यूपी के किस बॉर्डर पर पलटेगी, ये नहीं बताएंगे। इसे लेकर मुख्तार की पत्नी अफशां अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि उनके पति का हाल विकास दुबे जैसा हो सकता है, इसलिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए।
मुख्तार को 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सौंपने का आदेश दिया था। यूपी पुलिस ने मुख्तार को लाने का प्लान नहीं बताया था। यानी इसका खुलासा नहीं किया था कि वो रोपड़ से बांदा तक उसे किस रास्ते से लेकर आएगी। जो टीम मुख्तार को बांदा लेकर आई उसमें एक सीओ, दो इंस्पेक्टर, छह सब इंस्पेक्टर, 20 हेड कॉन्स्टेबल, 30 कॉन्स्टेबल और PAC की एक कंपनी शामिल थी। पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य हाइटेक सुविधाओं से लैस थे, ताकि हर परिस्थिति का सामना किया जा सके।
कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं
बाहर भले ही मुख्तार अंसारी की खूब आवभगत होती रही हो, लेकिन बांदा जेल में वो एक आम कैदी की तरह रहेगा। जेल पहुंचने पर मुख्तार ने कहा कि वो सफर से बहुत थक गया है। नहाकर सोना चाहता है। जेलर पीके त्रिपाठी ने कहा कि जेल में सभी कैदी एक समान हैं, चाहे वो मुख्तार हो या अन्य। कोरोना के चलते मुख्तार अभी अपने परिजनों ने नहीं मिल पाएगा। मुख्तार को जिस बैरक में रखा गया है, उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लखनऊ में एमपी एमएलए (सांसद-विधायक) की विशेष अदालत ने 12 अप्रैल को अभियुक्त मुख्तार अंसारी को साल 2000 में कारापाल और उप कारापाल पर हमला करने, जेल में पथराव तथा जानमाल की धमकी देने के मामले में आरोप तय करने के लिए व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
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