कई राज्यों में Vaccination अनिवार्य करने के खिलाफ SC में याचिका, केन्द्र ने कहा था- वैक्सीनेशन ऐच्छिक

Published : Jan 18, 2022, 11:39 AM IST
कई राज्यों में Vaccination अनिवार्य करने के खिलाफ SC में याचिका, केन्द्र ने कहा था- वैक्सीनेशन ऐच्छिक

सार

राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह टीकाकरण ( NTAGI) के पूर्व सदस्य डॉ जैकब पुलियेल ने अर्जी दायर की है। दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तो उसे अनिवार्य ही बना दिया गया है।

नई दिल्ली. दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों ने पब्लिक प्लेस में वैक्सीनेशन (Vaccination) अनिवार्य कर दिया है। ऐसे में कोविड वैक्सीन (COVID-19) अनिवार्य होने के खिलाफ कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  का दरवाजा खटखटाया है। दायर याचिका में याचिका में कहा गया है कि केंद्र का कहना है कि वैक्सीनेशन स्वैच्छिक है लेकिन राज्यों ने इसे कुछ उद्देश्यों के लिए अनिवार्य कर दिया है। राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने, सब्सिडी वाले अच्छे अनाज का लाभ उठाने के लिए  वैक्सीनेशन अनिवार्य करने का विरोध करते हुए अर्जी दी गई है।

किसने लगाई याचिका
राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह टीकाकरण ( NTAGI) के पूर्व सदस्य डॉ जैकब पुलियेल ने अर्जी दायर की है। केंद्र सरकार की इस दलील को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता जैकब पुलियल ने कहा है कि केंद्र सरकार भले ये कह रही है कि टीकाकरण ऐच्छिक है अनिवार्य नहीं  लेकिन दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तो उसे अनिवार्य ही बना दिया गया है।

जारी किया गया था सर्कुलर
जैकब की याचिका में मांग की गई है कि सरकार कोविड 19 के टीकों के क्लिनिकल ट्रायल की रिपोर्ट और उनकी क्षमता के आंकड़े सार्वजनिक करें। पुलियल ने अपनी याचिका में दिल्ली एनसीआर सरकार के पिछले साल 8 अक्तूबर , मध्य प्रदेश में 8 नवंबर, महाराष्ट्र में 27 नवंबर और तमिलनाडु में 18 नवंबर को जारी हुए सर्कुलर और उसमें साफ साफ लिखे दिशा निर्देश का भी हवाला दिया है जिसमें वैक्सीनेशन की अनिवार्यता वाली पाबंदियां लगाई गई हैं। 

क्या कहा था केन्द्र ने
बता दें कि वैक्सीनेशन पर नियमों में असमानता को लेकर दाखिल याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि देश भर में वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं है, न किसी पर वैक्सीन लगवाने का कोई दबाव है। सरकार ने हलफनामे में कहा है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध वैक्सीनेशन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है क्योंकि वैक्सीनेशन कोई जनादेश नहीं है. सरकार ने अब तक कोई भी SOP जारी नहीं की है, जो किसी भी योजना का लाभ लेने के मतलब या मकसद से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को अनिवार्य बनाती हो।

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