
नेशनल डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वायनाड दफ्तर में तोड़फोड़ के मामले पर केरल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को राहत दे दी है। कर्मचारियों पर आरोप था कि उन्होंने राहुल गांधी के वायनाड स्थित दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ करने के साथ महात्मा गांधी की तस्वीर को भी कथित तौर पर नुकसान पहुंचाया। मामले में कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजा विजयराघवन ने स्थानीय अदालत में कार्यवाही पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है।
यह है पूरा मामला
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बीते जून 2022 में सीपीआई (एम) की छात्र शाखा की ओर से राहुल गांधी के वायनाड स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान सीपीआई (एम) कार्यकर्ता कार्यालय के अंदर घुस गए और जमकर तोड़फोड़ की। कांग्रेस के वकील ने दावा किया कि अज्ञात युवकों की ओर से की गई तोड़फोड़ के दौरान महात्मा गांधी की तस्वीर को भी भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
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सीपीआई (एम) कार्यकर्ताओं ने आरोपों को किया खारिज
सीपीआई (एम) ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के निजी कर्मियों ने ही पहले महात्मा गांधी की तस्वीर को नुकसान पहुंचाया और फिर बाद में सीपीआई (एम) नेताओं पर आरोप मढ़ दिया। कोर्ट ने मामले में 13 जुलाई को जारी आदेश में 2022 में दर्ज मामले में शिकायतकर्ता को नोटिस भी जारी किया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें आरोपी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील टी आसिफ अली ने कहा कि किसी भी गवाह ने कार्यालय में महात्मा गांधी की तस्वीर को नुकसान पहुंचाने का कोई जिक्र नहीं किया है। उनपर लगाए गए आरोप गलत हैं।
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