वशिष्ठ नारायण सिंह के शव को तिरंगे में लपेटा गया, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

Published : Nov 14, 2019, 06:04 PM IST
वशिष्ठ नारायण सिंह के शव को तिरंगे में लपेटा गया, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

सार

देश के महान गणित वशिष्ठ नारायण सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद उनका पीएमसीएच में निधन हो गया। श्री सिंह देश के उन गिने-चुने गणितज्ञों में शुमार रहे हैं, जिन्होंने मैथ्स को एक नई परिभाषा दी। 

नई दिल्ली. देश के महान गणित वशिष्ठ नारायण सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद उनका पीएमसीएच में निधन हो गया। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। श्री सिंह देश के उन गिने-चुने गणितज्ञों में शुमार रहे हैं, जिन्होंने मैथ्स को एक नई परिभाषा दी। उनके बारे में कहा जाता है कि नासा द्वारा अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर्स कुछ समय के लिए बंद हो गए थे, तब कंप्यूटर ठीक होने पर वशिष्ठ नारायण और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था। हालांकि इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं।

सिजोप्रेनिया से थे पीड़िता
श्री सिंह करीब 40 साल से मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। वे लंबे समय से पटना के एक अपार्टमेंट में गुमनाम जिंदगी गुजार रहे थे। हालांकि मरने से पहले तक भी वे कॉपी-पेंसिल अपने साथ रखे रहे और कुछ न कुछ गणित लगाते रहे। श्री सिंह का लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। हाल में उन्हें छुट़्टी दी गई थी। लेकिन दुबारा तबीयत बिगड़ने पर गुरुवार को फिर से भर्ती कराया गया था। हालांकि जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। 

एम्बुलेंस देने से किया गया मना
डॉक्टरों ने जांच के बाद ब्रेन डेड बताया था।  74 साल के वशिष्ठ नारायण सिंह मूलरूप से भोजपुर जिले के बसंतपुर के रहने वाले थे। पटना में वे अपने छोटे भाई के घर पर रह रहे थे। परिजनों ने बताया कि श्री सिंह के परिजनों ने बताया कि पीएमसीएच ने एम्बुलेंस देने से मना कर दिया। उनका पार्थिव शरीर काफी देर तक ब्लड बैंक के पास रखना पड़ा। एम्बुलेंस वाले 5000 रुपए मांग रहे थे। उधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें महान विभूति बताया। उन्होंने कहा कि श्री सिंह ने बिहार का नाम रोशन किया।

अमेरिका से 10 बक्से भरकर किताबें लाए थे

श्री सिंह बचपन से ही तेजस्वी थे। उन्होंने मैथ्स से जुड़े कई फॉर्मूलों पर रिसर्च किया था। श्री सिंह ने आइंस्टीन जैसे ख्यात वैज्ञानिक के फॉर्मूले  E= MC2( इ= एमसी स्क्वायर) तक को चुनौती दी थी। एक बार तो उन्होंने पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अपने टीचर को भी बीच में टोक दिया था। टीचर ने कोई फॉर्मूला गलत बताया था। इस घटना के बाद कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें बुलाकर अलग से एग्जाम लिया था। यहां उन्होंने सारे अकादमिक रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसी बीच कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जे कैली उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। वे उन्हें अपने साथ अमेरिका ले गए।

- दरअसल, 1960 की बात है। कॉलेज में मैथमेटिक्स कांफ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी कांफ्रेंस में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बार्कले के एचओडी प्रो जॉन एल केली भी आए थे। कांफ्रेंस में गणित के पांच सबसे कठिन प्रॉब्लम्स दिए गए। उसे कोई सॉल्व नहीं कर सका, सिवाय वशिष्ठ नारायण सिंह के। श्री सिंह ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। फिर वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए। श्री सिंह ने नासा में भी काम किया। जब वे इंडिया लौटे, तो आईआईटी कानपुर, आईआईटी मुंबई और आईएसआई कोलकाता में अपनी सेवाएं दीं। कहते हैं कि जब श्री सिंह अमेरिका से लौटे, तो अपने साथ 10 बक्से किताबें लाए थे। 

वंदना रानी से हुई शादी
श्री सिंह 1971 में अमेरिका से भारत लौटे। 1973 में ही उनकी शादी बिहार के छपरा की रहने वाली वंदना रानी से हुई। लेकिन शादी के तीन दिन बाद ही वंदना ग्रेजुएशन की परीक्षा देने मायके चली गईं, फिर वापस नहीं लौटीं। 
1974 में श्री सिंह को दिल का दौरा पड़ा था। उस वक्त वे खुद ही हॉस्पिटल पहुंच गए थे। वशिष्ठ किसी भी फॉर्मूले को 5-8 तरीके से समझाते थे। डॉ. सिंह ने मैथ में रेयरेस्ट जीनियस गौस की थ्योरी को भी चैलेंज किया था। हालांकि बीमारी के चलते वे इस पर काम नहीं कर सके।

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