
नई दिल्ली/लखनऊ. बाबरी विध्वंस केस में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जो सबूत दिए हैं उनसे कुछ साबित नहीं होता है। स्पेशल कोर्ट के जज ने फैसले में कहा, ढांचा ढहाने की घटना अचानक हुई थी। फैसला आने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, बहुत समय बाद आज खुशी की खबर आई है। सबके लिए खुशी की बात है। उन्होंने जय श्री राम का नारा भी लगाया।
आडवाणी ने कहा- काफी दिनों बाद खुशी का समाचार
आडवाणी ने कहा, आज जो निर्णय आया है वह काफी महत्वपूर्ण है। यह काफी खुशी वाला दिन है। काफी दिनों बाद कोई खुशी का समाचार मिला है। स्पेशल कोर्ट का जो निर्णय हुआ है वह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह फैसले मेरा निजी और भाजपा के राम जन्मभूमि मूवमेंट की भावना को भी सही साबित करता है। मैं इस फैसले का तहेदिल से स्वागत करता हूं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा- कांग्रेस ने संतों को फंसाया
योगी आदित्यनाथ ने कहा, सत्यमेव जयते! CBI की विशेष अदालत के निर्णय का स्वागत है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो पूज्य संतों,बीजेपी नेताओं, विहिप पदाधिकारियों, समाजसेवियों को झूठे मुकदमों में फंसाकर बदनाम किया गया। इस षड्यंत्र के लिए इन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए।
मुरली मनोहर जोशी ने कहा- अब विवाद खत्म होना चाहिए
बाबरी विध्वंस मामले के फैसले पर मुरली मनोहर जोशी ने कहा, निर्णय इस बात को सिद्ध करता है कि 6 दिसंबर को अयोध्या में हुई घटनाओं के लिए कोई षड्यंत्र नहीं था और वो अचानक हुआ। इसके बाद विवाद समाप्त होना चाहिए और सारे देश को मिलकर भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए तत्पर होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा- देर से ही सही, मगर न्याय की जीत
राजनाथ सिंह ने कहा, लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में लालकृष्ण आडवाणी,कल्याण सिंह, डॉ.मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूँ। इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है।
इकबाल अंसारी ने कहा- हम फैसले का सम्मान करते हैं
बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया है ये अच्छी बात है, हम इसका सम्मान करते हैं।
आडवाणी के वकील ने कहा- आरोप साबित नहीं हो सके
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर लाल कृष्ण आडवाणी के वकील विमल श्रीवास्तव ने कहा, सभी आरोपी बरी कर दिए गए हैं, साक्ष्य इतने नहीं थे कि कोई आरोप साबित हो सके।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
6 दिसंबर 1992 को दोपहर 12 बजे ढांचे के पीछे से पथराव शुरू हुआ। अशोक सिंघल ढांचा सुरक्षित रखना चाहते थे, क्योंकि वहां मूर्तियां थीं। कारसेवकों के दोनों हाथ व्यस्त रखने के लिए जल और फूल लाने को कहा गया था। अखबारों में लिखी बातों को सबूत नहीं मान सकते। तस्वीरों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। तस्वीरों के निगेटिव पेश नहीं किए गए।
बाबरी केस निर्णय पर लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा जय श्री राम, देखें वीडियो
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