
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के वाराणसी कोर्ट ने पिछले दिनों ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा करने का अधिकार हिंदुओं को दिया। कोर्ट के इस फैसले का कई मुस्लिम नेताओं ने विरोध किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खालिद सैफुल्लाह रहमानी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोहतसिम खान जैसे नेताओं ने कोर्ट के आदेश के खिलाफ बात की है।
मुस्लिम नेताओं के भड़काऊ बयानों पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, "ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में कोर्ट के आदेश से हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार मिला। 30 साल पहले मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते हिंदुओं को पूजा करने के इस अधिकार से वंचित किया था। बिना किसी लिखित आदेश के किया था। हिंदुओं के साथ जो अन्याय किया गया, कोर्ट ने उस अन्याय को न्यायोचित ढंग से ठीक किया। पूरे देश को इसका स्वागत करना चाहिए।"
न्यायपालिका के फैसले का होना चाहिए स्वागत
सुरेंद्र जैन ने कहा, "किसी भी वर्ग के साथ अगर अन्याय हुआ है और न्यायपालिका उसे ठीक करती है तो वह निर्णय सबके लिए स्वागत योग्य होना चाहिए। लेकिन जिस प्रकार मुस्लिम पक्ष के कुछ नेताओं ने न्यायपालिका के इस निर्णय पर मुस्लिम समाज को भड़काने की कोशिश की है, काशी के अंदर दंगे और उपद्रव लाने की कोशिश की है। यह घोर आपत्तिजनक और निंदनीय है।"
उन्होंने कहा, "एक ओर वो न्यायपालिका में अपील के लिए भी जा रहे हैं। वहीं, सड़क पर दंगे भी करने की कोशिश कर रहे हैं और ये बयान देते हैं कि मुस्लिम समाज का न्यायपालिका पर से विश्वास उठ रहा है। कभी ये कहते हैं कि न्यायपालिका जिस रास्ते पर जा रही है वह उचित नहीं है। न्यायपालिका को धमकाने का प्रयास ये हर बार करते हैं। जब भी कोई निर्णय मुल्ला-मौलवियों के इच्छा के खिलाफ आता है।"
मुस्लिम समाज को आत्मघाती रास्ते की ओर ले जा रहा कट्टरपंथी नेतृत्व
सुरेंद्र जैन ने कहा, "न्यायपालिका डॉ. भीमराव अंबेडकर के बनाए गए संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के अनुसार काम कर रही है। जब भी किसी वर्ग को न्याय मिलता है, ये न्यायपालिका के प्रति सम्मान का विषय होना चाहिए। लेकिन जब भी फैसले इनके खिलाफ आते हैं ये इसी प्रकार का वातावरण तैयार करते हैं, चाहे शाहबानो का मामला हो, हिजाब का मामला हो या तीन तलाक का मामला। यहां तक कि अयोध्या के मामले में आज भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विष उगलते रहते हैं।"
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उन्होंने कहा, "ये कट्टरपंथी नेतृत्व मुस्लिम समाज को आत्मघाती रास्ते की ओर ले जा रहा है। वे सह अस्तित्व की जगह संघर्ष का मार्ग अपना रहे हैं। ये उचित नहीं है। मैं मुस्लिम समाज से भी अपील करना चाहता हूं कि वो ऐसे नेतृत्व को ठुकराए। ऐसे नेतृत्व को स्थापित करे जो सह अस्तित्व में विश्वास करता है।"
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