
चेन्नई. नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस पर जारी सियासी घमासान और विरोध के बीच उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत में कुछ लोगों को हिंदू शब्द से ही ऐलर्जी है। नायडू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब किसी एक खास धर्म का अपमान या तुष्टीकरण करना नहीं है। नागरिकता संशोधन अधिनियम पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए है।
धर्मनिरपेक्ष संस्कृति भारतीय लोकचार का हिस्सा
चेन्नै में श्री रामकृष्ण मठ द्वारा प्रकाशित तमिल मासिक श्री रामकृष्ण विजयम के शताब्दी समारोह और स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया ने कहा कि भारत में कुछ लोगों को हिंदू शब्द से ऐलर्जी है। हालांकि यह ठीक नहीं है, फिर भी उन्हें इस तरह का दृष्टिकोण रखने का अधिकार है। नायडू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब दूसरे धर्मों का अपमान नहीं है, जबकि धर्मनिरपेक्ष संस्कृति भारतीय लोकाचार का एक हिस्सा है।
'भारत अब प्रताड़ित लोगों को स्वीकार करने के लिए तैयार'
नायडू ने कहा कि देश ने हमेशा पीड़ित लोगों को शरण प्रदान किया है। स्वामी विवेकानंद एक सामाजिक सुधारक थे और उन्होंने पश्चिम में हिंदुत्व से परिचय कराया। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि वह ऐसे देश से हैं, जिसने विभिन्न देशों में प्रताड़ित लोगों और शरणार्थियों को शरण दी है। नायडू ने सीएए का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब प्रताड़ित लोगों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, जबकि कुछ तत्व इसके बारे में विवाद पैदा कर रहे हैं।
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