
लखनऊ. देश की बढ़ती आबादी को काबू में करने विभिन्न राज्य जनसंख्या नियंत्रण बिल लाने की तैयारी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे आगे चल रहा है। विश्व जनसंख्या दिवस(11 जुलाई) को योगी आदित्यनाथ ने यूपी में जनसंख्या नीति का ऐलान किया था। इसे लेकर विश्व हिंदू परिषद का बयान सामने आया है। VHP ने कुछ सवाल उठाते हुए सुझाव दिए हैं। बता दें कि राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या विधेयक-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।
जनसंख्या नीति को लेकर VHP सहित धर्म गुरुओं की अलग-अलग राय
यूपी की जनसंख्या नीति को लेकर धर्म गुरुओं की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ इसे चुनावी स्टंट भी मान रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद(VHP) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक बयान जारी करके कुछ सुझाव दिए हैं। साथ ही कुछ सवाल भी उठाए हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी ने विश्व जनसंख्या दिवस पर कहा कि बढ़ती आबादी विकास में बाधक है। इसलिए प्रजनन दर पर नियंत्रण जरूरी है। योगी ने दो टूक कहा कि हर जाति, धर्म और समुदाय को बढ़ती आबादी पर नियंत्रण की दिशा में सोचना होगा। VHP नेता ने कहा कि एक बच्चे की नीति से समाज में आबादी का असंतुलन पैदा हो सकता है। इससे निगेटिव ग्रोथ आएगी। इसलिए सरकार को इस बारे में फिर से विचार करना चाहिए। VHP ने इस संबंध में राज्य के विधि आयोग को अपनी आपत्ति और सुझाव भेजे हैं। VHP बिल के ड्राफ्ट से एक बच्चे वाले अभिभावकों को इंसेंटिव देने के प्रावधान को हटाने की मांग करेगा।
एक बच्चे पर पड़ेगा 4 जनों का भार
VHP ने कहा कि एक अनुबंधित जनसंख्या(बच्चों की निश्चित संख्या, जैसे 1 या 2) से लोगों की कार्यशील आयु और उन पर आश्रित लोगों के बीच का अनुपात बाधित हो जाता है। विहिप ने उदाहरण दिया कि एक बच्चे की नीति से 2 माता-पिता और दादा-दादी यानी 4 लोगों की जिम्मेदारी एक कामकाजी व्यस्क बच्चे के कंधे पर आ जाएगी।
VHP ने चीन की जनसंख्य पॉलिसी का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन ने 1980 में वन चाइल्ड की पॉलिसी अपनाई। इसके लिए प्रकृति के समान ही 1-2-4 घटना(phenomenon) कहा गया। बाद में चीन को इसमें ढील देनी पड़ी। विहिप का मानना है कि चीन की एक बच्चे की नीति कभी भी आधे से अधिक माता-पिता पर लागू ही नहीं हो सकी। फिर तीन दशक बाद इसे वापस लेना पड़ा।
विहिप ने कहा कि अकेला बच्चा सामाजिकतौर पर कम मिलनसार माना जाता है। वो इसलिए क्योंकि उसने अपने भाई-बहनों के साथ कुछ भी शेयर करना नहीं सीखा। ऐसे बच्चे अपने माता-पिता के अधिक लाड़ले होते हैं। यह एक सिंड्रोम लिटिल एम्परर (Little Emperor syndrome) है।
असम और केरल का उदाहरण दिया
विहिप ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मामले में वन चाइल्ड पॉलिसी से विभिन्न समुदायों के बीच असंतुलन पैदा होगा। वे हर समुदाय परिवार नियोजन से जुड़ी चीजों(गर्भनिरोधक) को लेकर अपने तरह से प्रतिक्रिया(सहयोग और विरोध) देता है। विहिप ने असम और केरल राज्य का उदाहरण देते हुए कहा यहां जनसंख्या का असंतुलन खतरनाक होता जा रहा है। यहां जनसंख्या में समग्र रूप से गिरावट आई है। दोनों राज्यों में हिंदुओं की जनसंख्या वृद्धि में 2.1 से नीचे गिरावट आई है। वहीं, असम में मुसलमानों की यही दर 3.16, जबकि केरल में 2.33 प्रतिशत है। यानी यहां हिंदुओं की जनसंख्या घट गई, जबकि मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है।
जनसंख्या नीति को लेकर और भी कई सुझाव और आपत्तियां
पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पूनम मुतरेजा का कहना है कि इससे टोटल फर्टिलिटी रेट में कमी आएगी। उन्होंने उदाहरण दिया कि 1992-93 में भारत में फर्टिलिटी रेट 3.4 थी, जो 2015-16 में घटकर 2.2 ही रह गई।
जैन गुरु जगतगुरु स्वास्ती रविंद्र कीर्ति स्वामी ने एक मीडिया हाउस से कहा कि यह नियम सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए। हालांकि वे मानते हैं कि ज्यादातर लोग 2 बच्चों पर सीमित हो चुके हैं।
ईसाई धर्म गुरु सविराममुथु मानते हैं कि बढ़ती आबादी सिर्फ भारत नहीं, पूरी दुनिया का मुद्दा है। उन्होंने सुझाव दिया कि नीति के बजाय जागरुकता पर जोर दिया जाना चाहिए।
सपा नेता सांसद शफीकुर्रहमान इसे चुनावी प्रोपेगेंड मानते हैं। उन्होंने ताना कसा कि 20 साल तक शादी पर रोक लगा देनी चाहिए। शादी नहीं होंगी, तो बच्चे भी नहीं होंगे।
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