वक्फ कानून वैध या अवैध? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, पूरी हुई सुनवाई

Published : May 22, 2025, 07:20 PM ISTUpdated : May 22, 2025, 08:08 PM IST
Supreme Court

सार

Waqf Act hearing in Supreme court: वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की वैधता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पांच मुख्य याचिकाओं पर ही सुनवाई कर रहा है। इन पांच याचिकाओं में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल है।

Waqf Act hearing in Supreme court: विवादित वक्फ संशोधन कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। पिछले तीन दिनों से कोर्ट लगातार इस मामले में सुनवाई कर रहा था। सीजेआई बीआर गवई की बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं।

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की वैधता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पांच मुख्य याचिकाओं पर ही सुनवाई कर रहा है। इन पांच याचिकाओं में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल है। सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन पैरवी कर रहे हैं तो केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता हैं।

तीन दिनों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में इस पर गंभीर बहस देखने को मिली। कपिल सिब्बल ने इसे अल्लाह को दी गई भेंट बताते हुए कहा कि वक्फ़ का उद्देश्य केवल दान नहीं, आत्मा की मुक्ति के लिए समर्पण है।

'दान सिर्फ इस्लाम में नहीं होता...'

लेकिन चीफ जस्टिस बी. आर. गवई ने साफ कहा कि धार्मिक दान केवल इस्लाम तक सीमित नहीं है। उन्होंने हिंदू धर्म में 'मोक्ष' और ईसाई धर्म में 'स्वर्ग' की अवधारणाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि हर धर्म में परमार्थ की अवधारणा है। जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने भी कहाकि हम सभी मोक्ष या स्वर्ग की ओर बढ़ना चाहते हैं।

कानून पर बहस: धर्म या प्रशासन?

सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि वक्फ़ एक धार्मिक अवधारणा जरूर है लेकिन यह इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और इसलिए इसे मौलिक अधिकार नहीं माना जा सकता। इसके विपरीत याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कोई भी बाहरी प्राधिकरण यह तय नहीं कर सकता कि वक्फ़ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं। कपिल सिब्बल ने Article 26 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून मुसलमानों को उनकी धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन से बाहर करता है।

वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य: संवैधानिक या असंवैधानिक?

नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड 'सेक्युलर' कार्य करता है, जैसे स्कूल, मदरसा, अनाथालय का संचालन, इसलिए उसमें विविधता होनी चाहिए। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या अब मंदिरों की प्रशासनिक इकाइयों में भी गैर-हिंदू नियुक्त होंगे?

धार्मिकता का प्रमाण-पत्र? ‘5 साल तक मुसलमान’ नियम पर सवाल

नए कानून के तहत वक्फ़ में दान देने के लिए कम-से-कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करना ज़रूरी कर दिया गया है। इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी: कौन से धर्म में दान देने से पहले धर्म का प्रमाण मांगा जाता है?

वक्फ़ बाय यूज़र: बिना कागज़ी सबूत के भूमि दावा अब नहीं

‘वक्फ़ बाय यूज़र (Waqf by User)’ प्रावधान को नए कानून में हटा दिया गया है, जिससे अब मुस्लिम उपयोग के आधार पर ज़मीन पर दावा नहीं किया जा सकता, अगर दस्तावेज़ न हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि 1954 के कानून में जो अधिकार दिया गया था, वह नया कानून समाप्त कर सकता है।

हालांकि कोर्ट ने इस पर चिंता जताई क्योंकि कुछ केसों में प्राचीन हिंदू मंदिरों पर भी वक्फ़ का दावा किया गया है। एक तमिलनाडु की महिला ने बताया कि उनके पूरे गांव को वक्फ घोषित कर दिया गया जिसमें चोल वंश काल का मंदिर भी शामिल है।

सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी कानून पर अंतरिम रोक लगाना न्यायिक संतुलन के विरुद्ध है क्योंकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता का अनुमान पहले से होता है।

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