Weather Report: पंजाब से राजस्थान तक शीतलहर, हिमालय पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का अलर्ट

Published : Dec 28, 2022, 08:41 AM ISTUpdated : Dec 28, 2022, 08:43 AM IST
Weather Report: पंजाब से राजस्थान तक शीतलहर, हिमालय पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का अलर्ट

सार

उत्तर भारत में ठंड का जबर्दस्त असर दिखाई दे रहा है। इस बीच स्काईवेदर ने कहा कि मालदीव और उससे सटे कोमोरिन क्षेत्र पर बना निम्न दबाव का क्षेत्र कम चिह्नित हो गया है। 29 दिसंबर की रात से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के पश्चिमी हिमालय तक पहुंचने की उम्मीद है।

वेदर रिपोर्ट. उत्तर भारत में ठंड का जबर्दस्त असर दिखाई दे रहा है। इस बीच स्काईवेदर ने कहा कि मालदीव और उससे सटे कोमोरिन क्षेत्र पर बना निम्न दबाव का क्षेत्र कम चिह्नित हो गया है। 29 दिसंबर की रात से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के पश्चिमी हिमालय तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, भारतीय मौसम विभाग(IMD) ने कहा है कि आजकल में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ में अलग-अलग इलाकों में शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। अगले दो दिनों में राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में शीतलहर से लेकर गंभीर शीतलहर चल सकती है। जानिए मौसम का बाकी हाल...


मौसम विभाग के अनुसार, हल्की हवा के प्रभाव और निचले क्षोभमंडल स्तरों में उच्च नमी के कारण आजकल में हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों और उत्तर राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में घना से बहुत घना कोहरा रह सकता है। मौसम विभाग और स्काईवेदर के अनुसार, आजकल में पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छा सकता है।

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली उत्तरी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में शीत लहर की स्थिति संभव है। कोल्ड डे की स्थिति अगले 24 घंटों के दौरान कम होने की संभावना है और यह केवल कुछ इलाकों में देखा जा सकता है। दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत में बारिश थमने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।


मौसम विभाग (MeT) के अनुसार, 29 से 30 दिसंबर के बीच कश्मीर घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश की उम्मीद है। निदेशक मौसम विज्ञान केंद्र कश्मीर, सोनम लोटस ने बताया कि वे 29-30 दिसंबर से दो दिन की बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घाटी में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम हिमपात की 70% संभावना है। बर्फ की तीव्रता बहुत कम होगी। ज्यादातर ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी होगी। इसी अवधि के दौरान मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होगी।

30 दिसंबर के बाद जम्मू और आसपास के जिलों में दृश्यता में सुधार होगा। हालांकि, किसी बड़ी बर्फबारी का कोई पूर्वानुमान नहीं है, लेकिन हल्की बर्फबारी और ठंड से कम तापमान के कारण 30 दिसंबर को सोनमर्ग-जोजिला, सिंथन टॉप, गुरेज-बांदीपोरा रोड आदि पर सतही परिवहन अस्थायी रूप से बाधित हो सकता है।

कश्मीर वर्तमान में 40 दिनों की सबसे कठोर सर्दियों की चपेट में है, जिसे स्थानीय रूप से 'चिल्लाई कलां' के रूप में जाना जाता है, जो 21 दिसंबर को शुरू हुई थी। इसके बाद 20 दिन की 'चिल्लाई खुर्द' और 10 दिन की अवधि का 'चिल्ला बच्चा होता है।

MeT के आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को रात का तापमान शून्य से नीचे रहा और श्रीनगर में तापमान शून्य से 4.8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। जबकि जम्मू में 2.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीजन की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई।


मौसम विभाग और स्काईवेदर के अनुसार, बीते दिन तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी असम के कुछ हिस्सों और अरुणाचल प्रदेश में हल्की बारिश हुई। रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और नागालैंड में हल्की बारिश हुई। पंजाब में हरियाणा के कुछ हिस्सों में और उत्तर पश्चिमी राजस्थान में एक या दो स्थानों पर घना कोहरा छाया रहा।दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छाया रहा।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई स्थानों पर कोल्ड डे से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति दर्ज की गई और जम्मू संभाग, उत्तर-पश्चिम राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में कोल्ड डे की स्थिति रही। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में शीत लहर की स्थिति रही।


 भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाक़ों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफान को पश्चिम विक्षोभ कहते हैं। यह वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अन्ध महासागर या अटलांटिक महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फ के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान व नेपाल पर गिरा देता है। उत्तर भारत में रबी की फसल के लिए विशेषकर गेंहू के लिए यह तूफ़ान लाभकारी होता है।

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