
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा अपनी पार्टी में बदलाव कर रही है। चुनाव से पहले ही राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य को राज्य भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अध्यक्ष बनते ही समिक भट्टाचार्य ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। समिक भट्टाचार्य की नियुक्ति को पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ और नए नेताओं के बीच एक सेतु के रूप में देखा जा रहा है। अब समिक भट्टाचार्य ने मुसलमानों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए एक आश्चर्यजनक बयान दिया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अपने पहले भाषण में समिक भट्टाचार्य ने कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बहुलवाद को मान्यता देनी होगी। हिंदू और मुसलमानों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देना होगा। हिंसा के बजाय शिक्षा पर ज़ोर देना होगा। कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रवादी मुसलमानों को भाजपा के साथ आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यहाँ सबके लिए पार्टी सबसे पहले होनी चाहिए। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष समेत कई नेताओं को सद्भाव का संदेश देना चाहिए। किसी भी व्यक्ति से बड़ी पार्टी होनी चाहिए, ये संदेश समिक भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया।
इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी के सामने आने वाली चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हमारी समस्याएँ कई स्तरों पर हैं। यहाँ का राजनीतिक परिदृश्य भी बहुत अलग है। हिंदू बंगाली, वामपंथी, जाति-आधारित समूह, मुस्लिम, सभी के अपने-अपने राजनीतिक विचार हैं। यहाँ के राजनीतिक विचार जगह-जगह बदलते रहते हैं।
पश्चिम बंगाल विदेशी घुसपैठ की समस्या से जूझ रहा है। रोहिंग्या यहाँ व्यवस्थित रूप से बस गए हैं। रोहिंग्या के समर्थन से तृणमूल कांग्रेस बार-बार सत्ता में आ रही है। जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों की तरह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम बड़ी संख्या में दिखाई देंगे। मूल पश्चिम बंगाल निवासी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। बांग्लादेश की हालिया घटनाओं के बाद, पारंपरिक वामपंथी और स्वयंभू प्रगतिशील लोगों के बयान खतरे की आशंका को बढ़ा रहे हैं।
भाजपा ने कभी नहीं कहा कि 100% हिंदू हमारे साथ हैं। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को 5-6% वोट मिले हैं। फिर भी भाजपा अपने संगठन में जुटी है। मुस्लिम मतदाताओं को अब समझ आ गया है कि भाजपा कम से कम 20 साल तक केंद्र की सत्ता में रहेगी। मुसलमानों को ये बात समझ आ गई है कि केंद्र सरकार उनके हित में काम कर रही है। उन्हें ये एहसास हो गया है कि दूसरे दल उन्हें सिर्फ़ वोट बैंक समझते हैं।
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