
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव (West Bengal Panchayat Elections) हो रहे हैं। चुनाव के लिए नामांकन शुरू होने के बाद से हिंसक घटनाएं हो रही हैं। चुनाव से जुड़ी हिंसा में कम से कम सात लोग मारे गए हैं। इसे देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इसपर सुनवाई हुई। कोर्ट ने चुनाव में हिंसा को लेकर राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से पूछा कि केंद्रीय बलों की तैनाती में क्या परेशानी है।
नामांकन के दौरान हिंसा हो रही है तो चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे?
कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से पूछा कि इससे आपको क्या दिक्कत है? सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार के वकील ने कहा कि राज्य में पहले भी चुनाव में हिंसा हुई है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव कराना हिंसा का लाइसेंस नहीं है। हिंसा के माहौल में निष्पक्ष चुनाव कैसे हो सकते हैं? जब नामांकन के दौरान ही हिंसा हो रही है तो चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे?
निष्पक्ष चुनाव कराना राज्य चुनाव आयोग की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना राज्य चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा, "हाईकोर्ट ने सोचा होगा कि अन्य पड़ोसी राज्यों से पुलिस बल की मांग करने से अच्छा है कि केंद्रीय बलों को तैनात किया जाए। इससे खर्च केंद्र द्वारा वहन किया जाएगा।" कोर्ट ने पूछा, "बल कहां से आते हैं यह राज्य चुनाव आयोग की चिंता नहीं है, फिर याचिका कैसे सुनवाई योग्य है?" सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।
15 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था 48 घंटे में तैनात करें केंद्रीय बल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 जून को राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि पंचायत चुनाव के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में की जाए। 15 जून को हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि सभी जिलों में केंद्रीय बलों की तैनाती 48 घंटे में की जाए। इसके लिए केंद्र से मांग की जाए। इसके बाद राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने मिलकर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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