
Online Gaming Bill: केंद्र सरकार ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग विधेयक को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य सट्टेबाजी ऐप्स को रेगुलेट और जुआ पर सख्त जांच करना है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को कानूनी ढांचे के नीचे लाया जा सकेगा। डिजिटल ऐप्स के माध्यम से जुआ खेलने पर सजा हो सकेगी।
ऑनलाइन गेमिंग विधेयक सरकार संसद में लाने जा रही है। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। यह विधेयक ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करेगा। इस क्षेत्र में हो रही धोखाधड़ी रोकेगा। विधेयक का उद्देश्य सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर लगाम लगाना है। इसे बुधवार को लोकसभा में चर्चा के लिए इसे पेश किया जा सकता है। सरकार ने यह कदम हाल के महीनों में सट्टेबाजी ऐप्स से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि के बाद उठाया है। जांच एजेंसियां ऐसे प्लेटफार्मों का प्रचार कर रहे मशहूर लोगों पर भी नजर रख रही हैं।
ऑनलाइन गेमिंग विधेयक सिर्फ एक नियामक ढांचा नहीं है। इसमें कड़ी सजा के भी प्रावधान हैं। आम लोगों से धोखेबाजी करने वाले ऑपरेटरों और सट्टेबाजी ऐप्स का प्रचार करने वाले लोगों के लिए सजा का प्रस्ताव किया गया है।
हाल के वर्षों में सरकार ऑनलाइन गेमिंग के क्षेत्र पर निगरानी कड़ी कर रही है। अक्टूबर 2023 से ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी लागू हो गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 से ऑनलाइन गेमिंग में जीत से मिली आमदनी पर 30% टैक्स लगेगा। यहां तक कि विदेशी गेमिंग प्लेटफॉर्म भी टैक्स के दायरे में आ गए हैं। एजेंसियों को बिना रजिस्टर्ड या अवैध साइटों को ब्लॉक करने का अधिकार है।
पिछले साल, भारतीय न्याय संहिता के तहत नए आपराधिक प्रावधान लागू हुए। इसके तहत अवैध सट्टेबाजी के लिए 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। हालाँकि, अवैध सट्टेबाजी और जुआ के खिलाफ कार्रवाई करने का मुख्य अधिकार राज्यों के पास है। "सट्टेबाजी और जुआ" संविधान की राज्य सूची में आते हैं। 2022 से फरवरी 2025 के बीच, सरकार ने 1400 से ज्यादा सट्टेबाजी और जुआ की वेबसाइटों और ऐप्स को ब्लॉक किया है।
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