
India Pakistan Tensions: पाकिस्तान के मुख्य परमाणु वैज्ञानिक रहे अब्दुल कादीर खान ने पत्रकार कुलदीप नैयर से कहा था, "कोई भी पाकिस्तान को खत्म नहीं कर सकता या हमें हल्के में नहीं ले सकता। अगर हमारे अस्तित्व को खतरा हुआ तो हम (पाकिस्तान) बम (परमाणु) का इस्तेमाल करेंगे।" कादीर खान ने ये बातें जनवरी 1987 के अंत में कहीं थीं। उस समय 1986-87 के ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स का चरम था। यह भारत का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास था। भारत ने पांच लाख सैनिकों बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को पाकिस्तान की सीमा के 180 किलोमीटर के भीतर तैनात किया था। इससे पूर्ण पैमाने पर लड़ाई शुरू होने का खतरा था।
करीब 40 साल बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इतना अधिक बढ़ गया है कि पूर्ण पैमाने पर लड़ाई शुरू होने का खतरा है। पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने हमला कर 26 नागरिकों की हत्या कर दी। इसके चलते भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित किया। पाकिस्तान ने भी शिमला समझौते को रद्द कर दिया। ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान ने अपने कुछ लड़ाकू विमानों को दक्षिणी ठिकानों से उत्तर की ओर, भारत की सीमा के करीब तैनात किया है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्ण युद्ध की संभावना बहुत कम है, लेकिन सीमित लड़ाई कई बार हुई है। ऐसे भी मौके आए हैं जब दोनों देश युद्ध के कगार से पीछे हट गए। 1987 का ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स ऐसा ही एक पल था।
1987 की सर्दियों में भारत ने सैन्य अभ्यास ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स किया था। इससे पाकिस्तान के पसीने छूट गए थे। पाकिस्तान से लगी सीमा पर भारत ने करीब अपनी आधी सेना को तैनात कर दिया था। ऑपरेशन ब्रासटैक्स दुनिया में अब तक हुए किसी भी नाटो अभ्यास से बड़ा था। पाकिस्तान डर गया था कि भारत लड़ाई शुरू करने वाला है। मार्च 1987 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट दी थी कि "ऑपरेशन ब्रासट्रैक्स दूसरे विश्व युद्ध के बाद से दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद शांतिकालीन सैन्य अभ्यास था।"
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स के समय भारत का नेतृत्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कर रहे थे। उन्होंने 1984 में अपनी मां और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पदभार संभाला था। पंजाब में उग्रवाद और कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा कराए गए अशांति ने भारत की स्थिरता को चुनौती दी थी। पाकिस्तान में सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक का राज था। पाकिस्तान की कुख्यात जासूसी एजेंसी आईएसआई और सेना लगातार हथियार, पैसे, ट्रेनिंग और मनोवैज्ञानिक समर्थन के जरिए पंजाब और कश्मीर में अशांति को हवा दे रही थी। आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के इच्छुक राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को मजबूत करने तथा भारत को स्थिर, दूरदर्शी देश के रूप में पेश करने के भी इच्छुक थे।
उस समय दुनिया कोल्ड वार की चपेट में थी। सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान अमेरिका पाकिस्तान का सहयोगी था। उसने उसे भारी मात्रा में हथियार दिए थे। वाशिंगटन धीरे-धीरे अपना ध्यान इस्लामाबाद के परमाणु हथियार कार्यक्रम की ओर मोड़ रहा था। दूसरी ओर, भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण (स्माइलिंग बुद्धा) कर लिया था। भारत पाकिस्तान के खिलाफ तीन लड़ाई और चीन के खिलाफ एक युद्ध लड़ने के बाद अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा था। इससे पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ना तय था।
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स दिसंबर 1986 में शुरू हुआ था। इसकी योजना तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल कृष्णास्वामी सुंदरजी ने बनाई थी। वह भारतीय सेना में व्यापक बदलाव का नेतृत्व कर रहे थे। अपनी नई मशीनीकृत युद्ध रणनीतियों को असल जमीन पर आजमाने के लिए उत्सुक थे।
नवंबर के मध्य में भारत के DGMO (Director-General of Military Operations) ने हॉटलाइन पर पाकिस्तान के DGMO से बात की। उन्हें बताया कि भारत के सैनिक जल्द ही राजस्थान में प्रवेश करेंगे। उस समय पाकिस्तान राजस्थान की सीमा के पार बहावलपुर-मरोट सेक्टर में अपना सैन्य अभ्यास सफ-ए-शिकन चला रहा था। रावी-चिनाब कॉरिडोर में दो अन्य पाकिस्तानी डिवीजन पास में ही थे। पाकिस्तानी समूहों को दिसंबर के मध्य तक अपना अभ्यास समाप्त करना था।
राजस्थान में बीकानेर और जैसलमेर के बीच रेगिस्तान में भारतीय सैनिकों और टैंकों की आवाजाही से घबराकर पाकिस्तानी सेना ने अपनी उत्तरी रिजर्व सेना को ऊपरी चिनाब नहर में भेज दिया। टैंक और बख्तरबंद डिवीजनों के साथ राजस्थान में भारतीय सेना मजबूती से अपनी स्थिति में बनी रही। सीमा पार पाकिस्तान ने भी ऐसा किया। जनवरी के अंत तक, करीब 3.4 लाख सैनिक मध्य रेगिस्तान से लेकर उत्तरी पहाड़ों तक सीमा के 400 किलोमीटर क्षेत्र में आमने-सामने खड़े थे। इससे दोनों देशों के बीच अचानक लड़ाई शुरू होने का जोखिम बढ़ गया था।
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