
नेशनल डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार को हुए नक्सली हमले में 24 जवान शहीद हुए है। इनमें पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान शामिल हैं। देखा जाए तो सामान्य तौर पर इन्हें शहीद कहा जाता है, लेकिन किसी आतंकवादी कार्रवाई के दौरान जान गंवाने के बाद औपचारिक तौर पर उन्हें 'शहीद' का दर्जा नहीं दिया जाता है और न ही उनके परिवार वालों को कोई खास सुविधाएं दी जाती हैं। ऐसे में, यह सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि सरकार संवैधानिक तौर पर शहीद (Martyr) का दर्जा किसे देती है। बता दें कि इसे लेकर साल 2017 में राज्यसभा सांसद किरणमय नंदा ने सवाल भी पूछा था।
क्या पूछा था नंदा ने
2013 में तत्कालीन राज्यसभा सदस्य किरणमय नंदा ने सरकार से पूछा था कि अर्धसैनिक बलों के जिन जवानों की मौत आतंकवादी गतिविधियों के दौरान अपना फर्ज निभाते हुए हो जाती है, उन्हें सरकार शहीद का दर्जा क्यों नहीं देती? उनका कहना था कि क्या सेना, वायु सेना या नौसेना के जवानों को ही शहीद का दर्जा दिया जा सकता है?
सरकार ने क्या दिया जवाब
इसके जवाब में कहा गया था कि सरकार की ओर से इस मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने माना था कि 'शहीद' शब्द की कोई सटीक परिभाषा नहीं है, वहीं सेना और अर्धसैनिक बलों में अंतर होने की बात भी कही गई थी। वहीं, गोपाल प्रसाद नाम के एक शख्स ने भी इसके बारे में आरटीआई दाखिल कर जवाब मांगा था और कहा था कि एक जैसा काम करने के बावजूद जहां सैनिकों को शहीद का दर्जा और उनके परिवार वालों को खास सुविधाएं दी जाती हैं, वहीं पुलिस और अर्धसैन्य बलों के जवानों को सिर्फ मृतक कहा जाता है।
सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग को क्या बताया
दिसंबर 2017 में भारत सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग को बताया था कि सरकार सेना, अर्धसैनिक बलों या पुलिस के मामले में 'शहीद' शब्द का इस्तेमाल नहीं करती। रक्षा मंत्रालय ने इस तरह का कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। अनौपचारिक तौर पर उन्हें शहीद कहा जाता है, लेकिन शहीदों को मिलने वाली सुविधाएं उन्हें नहीं दी जाता हैं। इनमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईसीएफ समेत तमाम पैरामिलिट्री फोर्स शामिल हैं।
शहीद को मिलती हैं ये सुविधाएं
शहीद का दर्जा मिलने पर जवान के परिवार को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। इनमें जमीन, मकान, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, शहीद की पत्नी को पूरा वेतन, शहीद के परिवार वालों को रेल और हवाई किराए में 50 फीसदी की छूट, राज्य सरकार की ओर से आर्थिक मदद और परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की सुविधा भी शामिल है।
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