
Operation Sindoor: अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद गिरफ्तारी के बाद से चर्चा में हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के सिलसिले में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया। इसके चलते हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उनके परिवार का नाता मुस्लिम लीग से है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अली खान महमूदाबाद ने सोशल मीडिया पर देश विरोधी बातें की थीं। कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मीडिया ब्रीफिंग को "दिखावटी" बताया था। कहा था, "दिखावटीपन को जमीनी हकीकत में बदलना होगा, नहीं तो यह सिर्फ पाखंड है।"
बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हमला किया था। इसके चलते 26 लोगों की मौत हुई थी। भारतीय सेनाओं ने 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर से इसका बदला लिया। पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंक के 9 अड्डों को तबाह कर दिया गया था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन सैन्य टकराव चला।
हरियाणा में भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव योगेश जठेरी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर अली को हिरासत में लिया गया था। उन पर बीएनएस के तहत विद्रोह भड़काने, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और धार्मिक भावनाओं का अपमान करने का आरोप लगाया गया है।
अली खान महमूदाबाद अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख हैं। उनका जन्म 2 दिसंबर 1982 को हुआ था। लखनऊ में अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद अली किंग्स कॉलेज स्कूल में पढ़ने के लिए इंग्लैंड चले गए। उन्होंने 2001 में विनचेस्टर कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और उसके बाद ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी किया।
महमूदाबाद 2019 से 2022 तक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। उन्हें अखिलेश यादव के सबसे करीबी लोगों में गिना जाता था। 2022 के बाद से महमूदाबाद ने पार्टी में कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला है। अली की शादी जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू की बेटी से हुई है।
अली मोहम्मद आमिर मोहम्मद खान के बेटे हैं। उन्हें राजा साहब महमूदाबाद के नाम से भी जाना जाता है। अली के पिता ने शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत जब्त की गई संपत्तियों को लेकर दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। 22 अक्टूबर 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया जिसके तहत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में फैली संपत्तियों को महमूदाबाद के तत्कालीन राजा को वापस कर दिया गया।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उनकी संपत्तियों में लखनऊ के बीचों-बीच कई बड़ी जमीन शामिल हैं। इनमें बटलर पैलेस, हजरतगंज बाजार का एक बड़ा हिस्सा, हलवासिया बाजार, महमूदाबाद किला शामिल हैं। इनकी कीमत आज हजारों करोड़ रुपए है। महमूदाबाद परिवार की संपत्ति लखनऊ, सीतापुर और उत्तराखंड के नैनीताल में फैली हुई है। अली की मां रानी विजय पद्म भूषण जगत सिंह मेहता की बेटी हैं। उन्होंने 1976-79 तक भारत के विदेश सचिव के रूप में कार्य किया था। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे।
अली खान महमूदाबाद के दादा मोहम्मद अली जिन्ना के करीबी सहयोगी थे। भारत के विभाजन से पहले वे लंबे समय तक मुस्लिम लीग के कोषाध्यक्ष थे। उन्होंने मुस्लिम लीग को बहुत पैसे दिए थे। 30 दिसंबर 1906 को अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना की गई। इसे भारत के दो राष्ट्रों में विभाजन सुनिश्चित करने के लिए जाना जाता है।
महमूदाबाद के राजा 1957 में पाकिस्तानी नागरिक बन गए। उनकी पत्नी और बेटे ने पाकिस्तान न जाने का फैसला किया, लेकिन उनकी बची हुई बड़ी संपत्ति को भारत-पाकिस्तान युद्ध के कारण 1965 में सरकार ने जब्त कर ली। 2005 के फैसले तक वह संपत्ति उनके अधिकार में नहीं थी।
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