जानें कौन हैं जस्टिस बोबडे, अयोध्या से सीजेआई को क्लीन चिट तक इन 5 फैसलों में निभाई अहम भूमिका

Published : Nov 18, 2019, 11:30 AM ISTUpdated : Nov 18, 2019, 11:39 AM IST
जानें कौन हैं जस्टिस बोबडे, अयोध्या से सीजेआई को क्लीन चिट तक इन 5 फैसलों में निभाई अहम भूमिका

सार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद बोबडे ने सोमवार को भारत के नए चीफ जस्टिस का पद संभाला। जस्टिस बोबडे देश के 47वें चीफ जस्टिस बन गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। 

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद बोबडे ने सोमवार को भारत के नए चीफ जस्टिस का पद संभाला। जस्टिस बोबडे देश के 47वें चीफ जस्टिस बन गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। इससे पहले पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रविवार को रिटायर हो गए। 

कौन हैं जस्टिस बोबड़े? 
जस्टिस बोबड़े चीफ जस्टिस गोगोई के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज हैं। वे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। जस्टिस बोबड़े का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को नागपुर में हुआ। वकालत उन्हें विरासत में मिली है। उनके दादा एक वकील थे, उनके पिता अरविंद बोबड़े महाराष्ट्र में जनरल एडवोकेट रहे और उनके बड़े भाई विनोद अरविंद बोबड़े भी सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील रहे हैं।  जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने नागपुर विश्वविद्यालय से बी.ए और एलएलबी किया था। वह 1978 में महाराष्ट्र बार काउंसिल के सदस्य बने थे। वे 21 साल तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते रहे। साल 1998 में उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता का पद संभाला।

2000 में अतिरिक्त जज के रूप में हुए
29 मार्च 2000 में जस्टिस बोबड़े को बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया। फिर 16 अक्टूबर 2012 को वे मध्य हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए। इसके बाद उन्होंने 12 अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस का पद संभाला। दो साल बाद 23 अप्रैल 2021 को वह रिटायर होंगे।

जस्टिस बोबड़े के बड़े फैसले

1 - अयोध्या विवाद: जस्टिस बोबड़े चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच में शामिल थे। देश के सबसे विवादित मामले में बेंच ने विवादित जमीन पर रामलला का मालिकाना हक बताया। 
2 - जस्टिस बोबड़े उस बेंच का हिस्सा थे, जिसने फैसला सुनाया था कि आधार ना होने पर किसी नागरिक को सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। 
3 - पटाखों पर बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, उस बेंच में जस्टिस बोबड़े भी शामिल थे। 
4 - कर्नाटक में मई 2018 में विधानसभा चुनाव नतीजों में जब किसी को बहुमत नहीं मिला था तो राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस बेंच में जस्टिस बोबड़े शामिल थे। 
5 - पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले में जस्टिस बोबडे ने उन्हें क्लीन चिट दी थी। जस्टिस रंजन गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की ही पूर्व कर्मी ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस मामले में जस्टिस बोबडे, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की कमेटी ने सीजेआई को क्लीन चिट दी थी। 

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