Tahawwur Rana : डॉक्टर से आतंकी बने तहव्वुर राणा की पूरी कुंडली, जिसके गुनाहों का अब हिसाब होगा

Published : Feb 14, 2025, 10:00 AM IST
Tahawwur Rana

सार

26/11 मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की अमेरिका ने मंजूरी दे दी है। यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। उसे आतंकी डेविड हेडली का करीबी बताया जाता है।

Tahawwur Rana Extradition : 26/11 मुंबई अटैक के गुनहगार के गुनाहों का अब पूरा हिसाब होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) आतंकी तहव्वुर राणा को भारत को देने की मंजूरी दे दी है। पीएम मोदी की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा कि अब इंसाफ करना होगा। पिछले महीने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। कोर्ट ने मामले में उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ समीक्षा याचिका को भी खारिज कर दिया था। आइए जानते हैं तहव्वुर राणा की पूरी कुंडली...

तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की जीत 

मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को भारत के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। कई सालों से अमेरिका से उसके प्रत्यर्पण की मांग की जा रही थी। एक साल से अमेरिकी अदालत में प्रत्यर्पण की सुनवाई चल रही थी। राणा कई बार कानूनी लड़ाई हार चुका था। यह उसका आखिरी मौका भी था।

तहव्वुर राणा का गुनाह क्या है 

16 साल पहले मुंबई अटैक के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली (David Headley) को तहव्वुर राणा ने ही आर्थिक मदद की थी। उसे अमेरिकी फेडरल पुलिस ने 2009 में गिरफ्तार किया था। उसी समय से उसके प्रत्यर्पण को लेकर दोनों देशों में बातचीत चल रही थी। अमेरिकी कोर्ट ने राणा को डेनमार्क में आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के आरोप में 14 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन मुंबई अटैक में उसे बरी कर दिया गया था।

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तहव्वुर राणा कौन है 

तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है। उसका जन्म पाकिस्तान में हुआ था। पेशे से वह एक डॉक्टर है। पाकिस्तानी सेना में बतौर डॉक्टर काम भी कर चुका है। राणा मुंबई अटैक के मास्टर माइंड डेविड हेडली का करीबी बताया जाता है। कहा जाता है कि राणा ने ही मुंबई हमले के लिए फाइनेंस किया था। हालांकि, अमेरिकी कोर्ट ने उसे इस मामले में बरी कर दिया था। लेकिन भारत ने अपनी कूटनीतिक चाल से उसे खिलाफ दोष सिद्ध करवाने और प्रत्यर्पण की बात की। राणा ने 13 नवंबर को यूएस के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।

तहव्वुर राणा और भारत की कूटनीतिक चाल 

साल 2009 में अमेरिकी FBI ने तहव्वुर राणा को पकड़ा था। उसे डेनमार्क में आतंकी हमले में 14 साल की सजा तो हुई लेकिन मुंबई अटैक मामले में बरी कर दिया गया था। भारत की कूटनीतिक चाल से 2020 में उसे मुंबई हमले के आरोप में एफबीआई ने फिर से गिरफ्तार किया। भारत ने डेविड हेडली को सरकारी गवाह बनाकर तहव्वुर राणा पर आरोप साबित किया।

मुंबई अटैक में बहा था मासूमों का खून

2008 में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकी कुबेर नाम के नाव से मुंबई में दाखिल हुए और कोहराम मचा दिया। उनके पास 10 एके-47, 10 पिस्टल, 80 ग्रेनेड थे। 26 नवंबर 2008 की रात 9 बजे से मुंबई में मौत का तांडव मचाया था। 60 घंटों तक चले कत्लेआम में 175 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। 9 आतंकी मार गिराए गए, जबकि एक अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था।

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