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Global Dispute Resolution: भारत बन सकता है ग्लोबल विवाद समाधान का हब-कैसे? CJI सूर्यकांत ने बताया पूरा रोडमैप
CJI Surya Kant Statement: भारत को ग्लोबल विवाद समाधान का भरोसेमंद केंद्र बनाने के लिए लिटिगेशन, आर्बिट्रेशन और मीडिएशन को साथ-साथ मजबूत करने की जरूरत है। इससे कोर्ट का बोझ घटेगा, केस जल्दी सुलझेंगे और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

India Global Legal Hub Plan: भारत की न्याय व्यवस्था और वैश्विक व्यापार को लेकर एक अहम चर्चा सामने आई है। भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा है कि अगर भारत को दुनिया में एक भरोसेमंद ग्लोबल डिस्प्यूट रेजोल्यूशन हब बनना है, तो देश को लिटिगेशन, आर्बिट्रेशन और मीडिएशन तीनों सिस्टम को साथ-साथ मजबूत करना होगा। उन्होंने यह बात इंडिया इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक 2026 (India International Disputes Week 2026) के दौरान कही, जहां भारत की क्रॉस-बॉर्डर विवाद सेवाओं के भविष्य पर चर्चा हो रही थी। उनके मुताबिक तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत और भरोसेमंद कानूनी व्यवस्था बहुत जरूरी है।
क्या भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था नई चुनौतियां भी ला रही है?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। भारतीय कंपनियां विदेशों में निवेश कर रही हैं और विदेशी निवेश भी तेजी से भारत में आ रहा है। आज के समय में व्यापार और कॉन्ट्रैक्ट केवल एक शहर या देश तक सीमित नहीं रहते। उदाहरण के तौर पर किसी डील पर बातचीत भारत में हो सकती है, उसका फाइनेंस सिंगापुर से आ सकता है और उसे लागू लंदन में किया जा सकता है। ऐसे में जब विवाद पैदा होते हैं, तो उन्हें सुलझाने के लिए मजबूत और भरोसेमंद कानूनी व्यवस्था की जरूरत होती है।
क्यों जरूरी है लिटिगेशन, आर्बिट्रेशन और मीडिएशन का साथ-साथ विकास?
CJI ने कहा कि अगर भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भरोसेमंद देश बनना है, तो केवल अदालतों पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा। लिटिगेशन यानी अदालतों में केस चलाने की प्रक्रिया के साथ-साथ आर्बिट्रेशन और मीडिएशन जैसे विकल्पों को भी मजबूत बनाना होगा। इन तरीकों से विवाद जल्दी और कम खर्च में सुलझाए जा सकते हैं। इससे न सिर्फ समय बचता है बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है।
क्या मीडिएशन भारत की न्याय व्यवस्था के लिए गेम चेंजर बन सकता है?
CJI सूर्यकांत ने मीडिएशन को न्याय व्यवस्था के लिए “गेम चेंजर” बताया। उनके मुताबिक अगर लोग अपने विवाद आपसी सहमति से सुलझाने लगें, तो अदालतों पर दबाव काफी कम हो सकता है। मीडिएशन में दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं। इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकता है और मामले जल्दी खत्म हो सकते हैं।
भारत में लंबित मामलों की बड़ी समस्या क्या है?
भारत की न्याय व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित मामलों की भारी संख्या है। देश की अलग-अलग अदालतों में लगभग 43 मिलियन यानी 4.3 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इतनी बड़ी संख्या में मामलों के कारण कई लोगों को न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। यही वजह है कि न्याय व्यवस्था में सुधार की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।
क्या भारत अपने आर्बिट्रेशन सिस्टम को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है?
भारत सरकार और न्यायपालिका अब ऐसे जॉइंट आर्बिट्रेशन और मीडिएशन पैनल बनाने की योजना पर काम कर रही है जिनमें अलग-अलग कानूनी परंपराओं के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े विवादों को जल्दी और बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकेगा। इसका मकसद यह भी है कि भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल डिस्प्यूट रेजोल्यूशन सेंटर के रूप में स्थापित किया जाए।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल क्या होता है?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब कोई निवेशक किसी देश में पैसा लगाता है, तो वह सबसे पहले एक महत्वपूर्ण सवाल पूछता है-अगर भविष्य में कोई विवाद होता है, तो क्या उसे निष्पक्ष न्याय मिलेगा? अगर किसी देश की कानूनी व्यवस्था मजबूत और भरोसेमंद होती है, तो निवेशकों का विश्वास भी बढ़ता है।
क्या असहमति विकास का हिस्सा है?
अपने भाषण के अंत में CJI ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि विवाद या असहमति किसी भी बढ़ती अर्थव्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा हैं। एक परिपक्व अर्थव्यवस्था वह नहीं होती जो विवादों से बचती है, बल्कि वह होती है जो उन्हें भरोसे और पारदर्शिता के साथ सुलझा सकती है। यही वजह है कि भारत अब अपनी न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
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