क्या कूनो राष्ट्रीय उद्यान सिर्फ चीतों का पार्क है? जानिए 7 रहस्य जिनके बारे में शायद आपने नहीं सुना

Published : Jun 22, 2026, 02:15 PM IST
Kuno National Park Facts

सार

Kuno National Park Facts: क्या कूनो राष्ट्रीय उद्यान सिर्फ चीतों का पार्क है? राष्ट्रपति मुर्मु के कूनो दौरे के बीच जानिए यहां के 7 रोचक तथ्य, दुर्लभ वन्यजीव से जुड़ी बातें।

Kuno National Park:  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) दौरे बीच मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित यह नेशनल पार्ट सुर्खियों में हैं। बता दें कि जब भी कूनो राष्ट्रीय उद्यान का नाम लिया जाता है, दिमाग में सबसे पहले चीते की तस्वीर उभरती है। आखिर भारत में करीब सात दशक बाद चीतों की वापसी यहीं से हुई थी। लेकिन क्या कूनो सिर्फ चीतों का पार्क है? दरअसल मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान आज देश के सबसे चर्चित वन्यजीव क्षेत्रों (Kuno National Park Animals) में शामिल है, लेकिन इसकी पहचान केवल चीता प्रोजेक्ट (Project Cheetah) तक सीमित नहीं है। यहां ऐसी कई खास बातें हैं, जिनके बारे में आम लोग कम जानते हैं। जानिए कूनो के 7 ऐसे रहस्य (Kuno National Park Facts), जो इसे भारत के सबसे अनोखे जंगलों में शामिल करते हैं।

1. चीता नहीं, तेंदुआ है यहां कूनो का पुराना बादशाह

कूनो में चीते हाल के वर्षों में आए हैं, लेकिन तेंदुए दशकों से इस जंगल का हिस्सा हैं। वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि यहां तेंदुओं की अच्छी-खासी आबादी मौजूद है। जंगल के कई हिस्सों में आज भी तेंदुआ शीर्ष शिकारी की भूमिका निभाता है।

2. कूनो नेशनल पार्क में सिर्फ बड़े शिकारी नहीं, दुर्लभ भेड़िए भी रहते हैं

कूनो का परिदृश्य घास के मैदानों और खुले जंगलों का मिश्रण है। यही वजह है कि यहां भारतीय भेड़िए भी पाए जाते हैं। देश में ऐसे बहुत कम संरक्षित क्षेत्र हैं जहां भेड़ियों की मौजूदगी दर्ज की जाती है।

3. चिंकारा और नीलगाय बनाते हैं इकोसिस्टम की रीढ़

अगर शिकार नहीं होंगे तो शिकारी भी नहीं टिकेंगे। कूनो में चिंकारा, नीलगाय, चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीव बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यही वन्यजीव चीतों और तेंदुओं के लिए प्राकृतिक शिकार आधार तैयार करते हैं।

4. कभी एशियाई शेरों का दूसरा घर बनने वाला था कूनो

बहुत कम लोग जानते हैं कि कूनो को वर्षों तक एशियाई शेरों के संभावित पुनर्वास स्थल के रूप में विकसित किया गया था। इसके लिए आसपास के कई गांवों का पुनर्वास भी किया गया। हालांकि बाद में यहां Project Cheetah को प्राथमिकता मिली।

5. 120 से ज्यादा पक्षी प्रजातियों का ठिकाना

कूनो केवल स्तनधारियों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षी प्रेमियों के लिए भी खास है। यहां कई स्थानीय और प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। सर्दियों में यह इलाका बर्ड वॉचिंग के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

6. चंबल लैंडस्केप से जुड़ता है कूनो का जंगल

कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भौगोलिक महत्व भी कम नहीं है। यह क्षेत्र चंबल नदी के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा हुआ है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही और जैव विविधता को फायदा मिलता है।

7. भारत के सबसे महत्वाकांक्षी संरक्षण प्रयोगों की प्रयोगशाला है कूनो राष्ट्रीय उद्यान

आज कूनो सिर्फ एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की जीवंत प्रयोगशाला बन चुका है। चीता पुनर्स्थापन से लेकर घास के मैदानों के संरक्षण और आधुनिक वन्यजीव निगरानी तक, यहां कई बड़े प्रयोग चल रहे हैं जिन पर दुनिया की नजर है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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