Indian Citizenship: 'मुझे भारतीय बनकर मरना है', 94 साल की अम्मा ने छोड़ दी अमेरिकी नागरिकता

Published : Jun 26, 2026, 05:16 PM IST
Indian Citizenship: 'मुझे भारतीय बनकर मरना है', 94 साल की अम्मा ने छोड़ दी अमेरिकी नागरिकता

सार

आंध्र प्रदेश की 94 साल की एक महिला ने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी है। वह अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन अपने देश में एक भारतीय नागरिक के तौर पर बिताना चाहती हैं। इसी गुहार के साथ वह कलेक्टर से मिलीं ताकि उन्हें जल्द से जल्द भारतीय नागरिकता वापस मिल सके।

बापटला (आंध्र प्रदेश): अमेरिका में करीब 20 साल बिताने के बाद भी एक मां का दिल अपनी मिट्टी के लिए ही धड़कता है। आंध्र प्रदेश के बापटला की रहने वाली 94 साल की कोंड्रगुंटा महालक्ष्मीम्मा अपनी ज़िंदगी के आखिरी पल अपने देश में, एक भारतीय के तौर पर बिताना चाहती हैं। इसी इच्छा के साथ वह ज़िला कलेक्टर के पास पहुंचीं।

कलेक्टर के सामने उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरी उम्र 95 साल होने वाली है। मैं अपने आखिरी दिन अपनी जन्मभूमि पर एक भारतीय नागरिक के तौर पर बिताना चाहती हूं। मेरा अंतिम संस्कार मेरे अपने गांव में ही होना चाहिए। इसलिए, प्लीज़ मुझे जल्द से जल्द भारतीय नागरिकता वापस दिला दीजिए..." कोंड्रगुंटा महालक्ष्मीम्मा का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने 18 साल अमेरिका में बिताए, वहां की नागरिकता भी ली, लेकिन अब उनकी आखिरी इच्छा एक भारतीय के रूप में मरने की है।

महालक्ष्मीम्मा आंध्र प्रदेश के बापटला ज़िले के चिंतागुंपाला गांव की रहने वाली हैं। पिछले बुधवार को वह अपने बेटे के साथ बापटला के ज़िला कलेक्टर जे. वेंकट मुरली से मिलीं, ताकि नागरिकता की प्रक्रिया में तेज़ी लाई जा सके। पति नागभूषणम की मौत के बाद महालक्ष्मीम्मा अपने बेटे बुचैया चौधरी, जो एक ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) हैं, के साथ रहने के लिए अमेरिका के वर्जीनिया चली गई थीं। जुलाई 2000 में उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल गई और इसके बाद वह 18 साल तक वहीं रहीं।

लेकिन जब उनके बेटे को मंगलगिरि के एनआरआई अस्पताल में नौकरी मिली, तो वे 2018 में भारत लौट आए और अपने गांव में ही बस गए। महालक्ष्मीम्मा ने अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि वह भारतीय संविधान का पूरा सम्मान करेंगी और देश के कानूनों का पालन करेंगी। उन्होंने कलेक्टर को बताया कि वह आधिकारिक तौर पर अमेरिकी नागरिकता छोड़ चुकी हैं और भारतीय नागरिकता के लिए ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए आवेदन भी कर दिया है। उनकी बस यही मांग है कि जिस मिट्टी में वह पैदा हुईं, वहां जीने का कानूनी अधिकार उन्हें जल्द से जल्द दिया जाए।

ज़िला कलेक्टर जे. वेंकट मुरली ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनके आवेदन की जांच सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जल्द से जल्द की जाएगी। स्थानीय जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय नागरिकता बहाल करने पर अंतिम फैसला लेगा।

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