
Abhishek Banerjee Attack: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक ऐसा सच सामने आ रहा है जिसने पूरी टीएमसी को हिलाकर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी...।
शनिवार को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हिंसक हमले के बाद राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया था। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन, मामले की जांच में जुटी पुलिस ने जब सघन छापेमारी के बाद कम से कम पांच लोगों को गिरफ्तार किया, तो कहानी ने अचानक एक बिल्कुल नया और अप्रत्याशित मोड़ ले लिया।
🚨 JUST IN: TMC MP Abhishek Banerjee was allegedly attacked with eggs during a visit to Sonarpur, West Bengal.
The incident has sparked a political row, with reactions pouring in from across the spectrum. pic.twitter.com/zbfhCjMNNa— IND LIVE (@ind_live_news) May 30, 2026
गिरफ्तार किए गए लोगों में तपन माइती, आकाश गायेन, निर्मल्या सेनगुप्ता (उर्फ जॉय), काजल दास और देबाशीष दत्ता शामिल हैं। इनमें से तपन माइती और आकाश को कथित तौर पर उस वायरल वीडियो में भी देखा गया था, जिसमें अभिषेक बनर्जी पर पत्थरों और अंडों की बौछार की जा रही थी। शुरुआती जांच में लग रहा था कि यह विपक्ष की कोई सोची-समझी साजिश है, लेकिन जैसे ही आरोपियों की कुंडली खंगाली गई, सच जानकर खुद जांचकर्ताओं के होश उड़ गए।
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और सनसनीखेज सस्पेंस तब खुला जब सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई कि गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में से चार के तार किसी विपक्षी पार्टी से नहीं, बल्कि खुद टीएमसी की ही पूर्व विधायक लवली मैत्रा से जुड़े हुए हैं।
पता चला है कि तपन माइती और निर्मल्या सेनगुप्ता (जॉय) पूर्व विधायक लवली मैत्रा के बेहद करीबी माने जाते हैं। इसके अलावा, काजल दास और देबाशीष दत्ता का भी पूर्व विधायक के साथ सीधा जुड़ाव रहा है। महज़ एक महीने पहले तक जो लोग टीएमसी विधायक के इर्द-गिर्द घूमते थे, वे अचानक पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी की जान के दुश्मन कैसे बन गए? इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारों में यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह महज जनता का गुस्सा था, या फिर पार्टी के भीतर सुलग रही किसी बड़ी बगावत की खौफनाक स्क्रिप्ट?
गिरफ्तार आरोपियों में से एक, आकाश गायेन की कहानी इस पूरे मामले के सस्पेंस को एक नया मानवीय और रहस्यमयी आयाम देती है। इलाके में आकाश को टीएमसी के एक वफादार जमीनी कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद उसकी मां ने रोते हुए मीडिया के सामने एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया।
आकाश की मां ने स्वीकार किया कि उनका बेटा पूरी तरह टीएमसी से जुड़ा हुआ था और चुनावों के दौरान वह नियमित रूप से पार्टी के बूथों पर बैठता था। उन्होंने कहा, "मेरे बेटे का अभिषेक बनर्जी से कोई निजी बैर नहीं था। शुक्रवार दोपहर को घटना के बाद वह हमेशा की तरह घर लौटा, खाना खाया और पास के मैदान में फुटबॉल खेलने चला गया। रात को अचानक पुलिस आई और उसे उठा ले गई।" आकाश के पिता एक वैन-रिक्शा चालक हैं और आकाश खुद बेरोजगार था। एक वफादार कार्यकर्ता की इस हिंसक संलिप्तता के पीछे किसका दिमाग काम कर रहा था, यह रहस्य अब गहराता जा रहा है।
लवली मैत्रा के करीबियों की इस गिरफ्तारी ने ममता बनर्जी के उन दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिसमें उन्होंने इस हमले के पीछे बीजेपी का हाथ बताया था। हालांकि बीजेपी ने इस घटना में अपनी किसी भी संलिप्तता से साफ इनकार किया है।
अब राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को टीएमसी के भीतर चल रही आंतरिक गुटबाजी और तीखे मतभेदों के रूप में देख रहे हैं। क्या यह हमला अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद को रोकने के लिए पार्टी के ही एक धड़े द्वारा रची गई अंदरूनी प्रतिद्वंद्विता का नतीजा था? इसके साथ ही ममता बनर्जी ने प्रशासन पर यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि वे घायल अभिषेक बनर्जी को सही इलाज मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। अस्पताल के कमरों से लेकर पुलिस की फाइलों तक, यह मामला अब एक ऐसे चक्रव्यूह में बदल चुका है, जिसकी अंतिम कड़ियां कहां जाकर जुड़ेंगी, यह तो वक्त ही बताएगा।
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