Amritsar E-Rickshaw Accident: अमृतसर में विदेशी पर्यटकों से भरा ई-रिक्शा सड़क किनारे पलटने का वीडियो वायरल है। घटना के बाद से ई-रिक्शा की सेफ्टी, ड्राइवर ट्रेनिंग और सड़क सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। क्या आम यात्री भी ऐसे सफर में सुरक्षित हैं?
अमृतसर में पलटा ई-रिक्शा: वायरल वीडियो ने फिर उठाए सेफ्टी पर सवाल
भारत के लगभग हर शहर में ई-रिक्शा आज आम जनजीवन का हिस्सा बन चुके हैं। छोटी दूरी तय करने से लेकर बाजार, रेलवे स्टेशन और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में लोग इन्हीं पर निर्भर रहते हैं। कम किराया, आसानी से उपलब्धता और ट्रैफिक में निकल जाने की क्षमता, इन वजहों से ई-रिक्शा शहरी और अर्ध-शहरी परिवहन का अहम साधन बन गए हैं। लेकिन हाल ही में पंजाब के अमृतसर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने इस सुविधा के पीछे छिपे सुरक्षा सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक, अमृतसर में कुछ विदेशी पर्यटक ई-रिक्शा से सफर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि सुमन कैसल के सामने उनका ई-रिक्शा अचानक सड़क किनारे पलट गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि वाहन पलटने के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है और आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़ते हैं। करीब 88 सेकंड की फुटेज में स्थानीय लोग ई-रिक्शा में फंसे 3 से 4 विदेशियों को बाहर निकालते नजर आते हैं। एक महिला यात्री घबराई हुई दिखती है, जिसे सबसे पहले बाहर निकाला जाता है। इसके बाद अन्य यात्रियों को सुरक्षित बाहर लाया जाता है और अंत में पलटे हुए ई-रिक्शा को सीधा कर दिया जाता है।
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लाइव कमेंट्री और सोशल मीडिया पर बहस
यह वीडियो X पर @Deadlykalesh नामक यूजर द्वारा पोस्ट किया गया है। पोस्ट के कुछ ही घंटों में इसे हजारों व्यूज और सैकड़ों प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं। वीडियो रिकॉर्ड कर रहा व्यक्ति घटनास्थल से लाइव कमेंट्री करता सुनाई देता है, वह कहता है कि विदेशी गिर गए हैं और उन्हें चोट लगी है, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया जाएगा। हालांकि, घायल होने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
कमेंट सेक्शन में लोगों ने ई-रिक्शा की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। कई यूजर्स का कहना है कि कुछ ई-रिक्शा चालक पर्याप्त ड्राइविंग अनुभव या प्रशिक्षण के बिना वाहन चलाते हैं। अचानक मोड़ लेना, बीच सड़क में रोक देना या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना, ये सभी जोखिम को बढ़ाते हैं।
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हल्के कमेंट्स बनाम गंभीर सवाल
जहां कई लोग घटना को लेकर चिंतित दिखे, वहीं कुछ यूजर्स ने हल्के-फुल्के या असंवेदनशील कमेंट भी किए। किसी ने लिखा कि “कहीं डॉलर तो नहीं गिरा”, तो कुछ ने यह तर्क दिया कि विदेशी पर्यटक कम खर्च में यात्रा करना चाहते हैं, इसलिए ऐसे साधनों का उपयोग करते हैं। लेकिन असली सवाल इससे कहीं बड़ा है, क्या रोज इन ई-रिक्शा में सफर करने वाले आम भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ई-रिक्शा का ढांचा हल्का होता है और इनमें पारंपरिक ऑटो या कार जैसी मजबूत बॉडी नहीं होती। अधिकांश ई-रिक्शा में सीट बेल्ट, साइड प्रोटेक्शन या उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं भी नहीं होतीं। ऐसे में तेज मोड़, असंतुलन या सड़क किनारे की ढलान पर पलटने का खतरा बना रहता है।
इसके अलावा, ड्राइवरों की औपचारिक ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया भी कई जगहों पर सख्ती से लागू नहीं होती। यदि स्पीड कंट्रोल, इंडिकेटर का सही उपयोग, हॉर्न का संतुलित प्रयोग और ट्रैफिक के बीच सुरक्षित ड्राइविंग की समझ न हो, तो दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
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जिम्मेदारी किसकी?
यह घटना केवल एक वायरल वीडियो भर नहीं है, बल्कि शहरी परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। जरूरत है कि:
ई-रिक्शा चालकों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण और प्रमाणन व्यवस्था मजबूत हो
वाहनों की नियमित फिटनेस जांच हो
स्थानीय प्रशासन सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करे
यात्रियों को भी क्षमता से अधिक सवारी न बैठने देने और सावधानी बरतने की जागरूकता हो
अमृतसर की यह घटना एक चेतावनी की तरह है। भले ही वायरल वीडियो में दिख रहे विदेशी पर्यटकों को गंभीर चोट की पुष्टि न हो, लेकिन सवाल कायम है, क्या हमारी सड़कों पर चल रहे हजारों ई-रिक्शा पर्याप्त रूप से सुरक्षित हैं? सस्ती और सुलभ यात्रा अच्छी बात है, लेकिन सुरक्षा की कीमत पर नहीं। यदि ई-रिक्शा शहरी भारत की जरूरत बन चुके हैं, तो उन्हें सुरक्षित बनाना और चालकों को प्रशिक्षित करना भी उतना ही जरूरी है। तभी ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और आम यात्रियों का भरोसा कायम रखा जा सकता है।
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