सरकार संभल जाए! क्या बोले सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे अन्ना हजारे?

Published : Jul 18, 2026, 08:40 PM IST
Anna hazare on Sonam Wangchuk

सार

अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक से बातचीत करने की अपील की। वहीं, जंतर-मंतर पर 21वें दिन भी कॉकरोच जनता पार्टी का धरना जारी रहा।

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार 18 जुलाई को कहा कि केंद्र सरकार को सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए। अन्ना हजारे ने कहा, सरकार को उनकी मांगों पर चर्चा करनी चाहिए। यह बयान उस समय आया है जब दिल्ली पुलिस वांगचुक को इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले गई। समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा, "सरकार को उनके सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उनकी मांगों पर हां या ना कहना सरकार का अधिकार है, लेकिन बातचीत करने में कोई बुराई नहीं है।"

अन्ना हजारे ने अपने आंदोलन का भी किया जिक्र

अन्ना हजारे की यह अपील उनके वर्ष 2011 के लोकपाल आंदोलन की याद दिलाती है। उस समय उन्होंने लोकपाल कानून की मांग को लेकर लंबी भूख हड़ताल की थी, जिसने तत्कालीन UPA सरकार पर बड़ा राजनीतिक दबाव बनाया था।

सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?

दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार सोनम वांगचुक की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही थी। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें इलाज और मेडिकल निगरानी के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके का आरोप है कि वांगचुक को उनकी इच्छा के खिलाफ जबरन अस्पताल ले जाया गया।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

कुछ छात्र प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विरोध स्थल पर उनके साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और खुद को मेडिकल टीम का सदस्य बताया। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि पुलिस ने स्वयंसेवकों को एक तरफ हटने के लिए कहा और उसके बाद कार्रवाई की।

CJP ने अदालत के आदेश की गलत व्याख्या का लगाया आरोप

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाते समय दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का गलत अर्थ निकाला। उन्होंने कहा कि अदालत ने केवल वांगचुक की सेहत की निगरानी करने का निर्देश दिया था और जरूरत पड़ने पर ही हस्तक्षेप करने को कहा था।

'मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही थी'

सौरव दास के अनुसार, CJP की मेडिकल टीम दिन में दो से तीन बार सोनम वांगचुक की हेल्थ जांच रही थी। उनका कहना है कि वांगचुक भी रोज वीडियो जारी कर अपनी सेहत की जानकारी साझा कर रहे थे और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही थी। दास ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अदालत के आदेश की आड़ में उन्हें हिरासत में लिया, जिसे उन्होंने अदालत की अवमानना बताया।

मामले पर अलग-अलग दावे

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना के बाद मामले को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। एक ओर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई अदालत के निर्देश और मेडिकल सलाह के आधार पर की गई, जबकि प्रदर्शनकारी और CJP से जुड़े लोगों का आरोप है कि उन्हें जबरन हटाया गया। मामले को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

21वें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल

सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। शनिवार, 18 जुलाई, को जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 21वां दिन था।

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